Proverbs of Solomon

Proverbs of Solomon

अध्याय 1

1 यह किताब सुलैमान की बुद्धि की बातों का संग्रह है, जो इस्राएल पर राज्य करता था और राजा दाऊद का बेटा था।
2 सुलैमान ने ये बुद्धि की बातें इसलिए लिखी ताकि हम समझ सकें कि बुद्धि है क्या। वह चाहता था कि हम सीखें कि हमें उचित सुधारों के प्रति कैसे बर्ताव करना चाहिए। यह किताब इसलिए लिखी गई ताकि हम बुद्धिमान लोगों के शब्दों में छिपे हुए मतलब को समझ सकें।
3 सुलैमान ने इन बुद्धि की बातों को इकट्ठा किया, जो हमारे चरित्र पर काम करने और बुद्धि से काम करने में हमारी मदद कर सकती है। तब हम समझ पाएंगे कि धार्मिकता, न्याय और ईमानदारी क्या हैं।
4 अगर साधारण व्यक्ति बुद्धि की बातों को सुनेगा तो वह समझदार बन जाएगा। अगर जवान व्यक्ति बुद्धि की बातों को ध्यान से पढ़ेगा तो उसे ज्ञान मिलेगा, जो उसे सिखाएगा कि सही फैसले कैसे लेने हैं।
5 अगर बुद्धिमान व्यक्ति बुद्धि की बातों पर ध्यान देगा तो वह अपने ज्ञान को बढ़ाएगा। और अगर पढ़ा-लिखा व्यक्ति बुद्धि की बातों को सुनेगा तो वह उनमें बहुमूल्य सलाह को पाएगा।
6 जो बुद्धि की बातों को ध्यान से पढ़ता है वह उन लोगों को समझना सीखेगा, जो छिपे हुए मतलब के साथ या मज़ाक में बोलते हैं। वह समझ पाएगा कि बुद्धिमान लोगों का क्या मतलब है।
7 जो प्रभु का भय मानता है वह समझने लगेगा कि बुद्धि क्या है। सिर्फ़ मूर्ख ही बुद्धि और उचित सुधारों से घृणा करते हैं।
8 हे मेरे बेटे, अपने पिता की बात सुनो जब वह तुम्हारा उचित सुधार करता है। और जब तुम्हारी माता तुम्हें परमेश्वर के कानून को सिखाती है तब तुम उसे मत रोको।
9 तुम्हारे माता-पिता तुम्हें जो बताते हैं उस पर ध्यान दो। तब अनुग्रह मुकुट की तरह तुम पर चमकेगा और हार की तरह तुम्हें सजाएगा।
10 हे मेरे बेटे, पापियों को तुम्हें पाप में मत धकेलने दो।
11 वे तुम्हें मना लेंगे और कहेंगे, “हमारे साथ आओ! हम जाल बिछाएंगे और छिपने की जगह में इन्तज़ार करेंगे। फिर अचानक किसी निर्दोष व्यक्ति पर हमला करेंगे और उसे बिना किसी कारण के मार डालेंगे।”
12 हे मेरे बेटे, अपराधी कहेंगे, “चलो, हम जीवित लोगों को नरक में भेजें और उन्हें सीधे ही मरे हुए लोगों के पास कब्र में डाल दें।”
13 डाकू कहेंगे, “हम सभी प्रकार की बहुमूल्य चीजें चुराएंगे और अपने घरों को लूट की चीजों से भर लेंगे।”
14 अपराधी कहेंगे, “आ जाओ, और तुम हमारे साथ पर्चियाँ डालना। जो तुम जीतो उसे तुम ले लेना और इस तरह हम चुराई हुई चीजों को बांट लेंगे।”
15 हे मेरे बेटे, किसी भी उपद्रवी मंडली में शामिल न होना, सभी अपराधियों से दूर रहना।
16 याद रखना कि अपराधी बुराई करने के लिए बेसब्र होते हैं। और बिना किसी झिझक के वे हत्या कर देते हैं।
17 पक्षी कभी भी नहीं सोचते कि उनमें से कोई भी जाल में फंसेगा।
18 लेकिन शिकारी छिपने की जगह में इन्तज़ार करते हैं और मारने के लिए पक्षियों को फसाते हैं।
19 ऐसा ही उस व्यक्ति के साथ होगा, जो दूसरों की चीजें चोरी करना चाहता है। ये चुराई हुई चीजें ही उससे उसके जीवन को छीन लेंगी।
20 बुद्धि गलियों में और चौकों में सभी से ज़ोर ज़ोर से कहती है।
21 वह हर जगह जहाँ लोग इकट्ठे होते हैं प्रचार करती है। बुद्धि उन लोगों से बात करती है, जो शहर में प्रवेश करते हैं और फाटक से होकर चले जाते हैं।
22 और वह यही कहती है, “तुम, जिसके पास ज्ञान नहीं, कब तक अपने अज्ञान से प्रेम रखोगे? तुम, जो दूसरों का अपमान करते हो, कब तक अपमान करके आनन्द मनाते रहोगे? और तुम, मूर्खों, कब तक ज्ञान से नफ़रत करोगे?
23 बुद्धि कहती है, “जब मैं तुम्हें ठीक करती हूँ तब मेरी सुनो और अपने पापों से मन फिराओ। और फिर मैं अपनी आत्मा तुम पर उँडेल दूँगी और जो कुछ मैं जानती हूँ वह तुम्हें सिखाऊँगी।
24 लेकिन जब मैंने तुम्हें पुकारा तब तुमने नहीं सुना। और जब मैंने मदद करनी चाही और अपने हाथ तुम तक फैलाये तब किसी ने मुझ पर ध्यान नहीं दिया।
25 तुमने मेरी सारी सलाहों को अनदेखा किया और अपने जीवन को बदलने से इनकार कर दिया।
26 इसलिए जब तुम पर मुसीबत आएगी तब मैं हँसूँगी। और जब तुम घबराओगे तब मैं आनन्द मनाऊँगी।
27 अत्यंत भय तूफ़ान की तरह तुम पर आ पड़ेगा। और तबाही अचानक बवंडर की तरह तुम पर आ पड़ेगी। और तुम कष्ट और मुश्किल परिस्थितियों में जीवन बिताओगे।
28 तब मूर्ख मुझे पुकारेंगे लेकिन मैं उनकी नहीं सुनूँगी। वे मुझे ढूँढेंगे लेकिन वे मुझको नहीं ढूँढ पाएंगे।
29 उनके साथ ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि उन्होंने ज्ञान से नफ़रत की। उन्होंने प्रभु की बात मानने से इंकार किया और ऐसे जीने लगे जैसे कि परमेश्वर है ही नहीं।
30 उन्होंने मेरी सभी सलाहों को नकार दिया। और जब मैंने उन्हें सही किया तब उन्होंने मेरी निंदा ​​की।
31 इसलिए वे कड़वे फल खाएंगे, जो उनके जीवन में बढ़ेंगे। उन्होंने दूसरों को नुकसान पहुँचाने की योजना बनाई लेकिन उनकी दुष्ट योजनाएँ उनके अपने जीवन को नष्ट कर देंगी।
32 जिनके पास कोई ज्ञान नहीं, वे बुद्धि के खिलाफ़ विद्रोह करेंगे और यह उन्हें मौत की ओर ले जाएगा। मूर्ख जीवन को गम्भीरता से नहीं लेते हैं, और यह उन्हें नष्ट कर देगा।
33 और जो मेरी बात सुनेगा वह बुराई से न डरेगा। वह सुरक्षित और शांति से रहेगा।”

अध्याय 2

1 हे मेरे बेटे, मेरे शब्दों को याद रखना और उन आज्ञाओं को कभी मत भूलना, जिनके बारे में मैंने तुम्हें बताया था।
2 ध्यान से सुनो कि बुद्धि क्या कहती है। सोचना और मनन करना सीखो।
3 ज्ञान को ढूँढो और अपनी सोचने की क्षमता को बढ़ाओ।
4 ज्ञान को ऐसे ढूँढो जैसे तुम चाँदी या ख़ज़ाने को ढूँढते हो।
5 तब तुम सीखोगे कि प्रभु का भय क्या है और तुम समझोगे कि परमेश्वर कौन है।
6 प्रभु बुद्धि देता है। वह ऐसे शब्द बोलता है, जो व्यक्ति को ज्ञान और समझ देते हैं।
7 परमेश्वर उन लोगों को सफलता देता है, जो ईमानदारी से काम करते हैं। और वह अपनी ढाल से उनकी रक्षा करता है।
8 प्रभु उन लोगों के जीवन के सभी क्षेत्रों की रखवाली करता है, जो ईमानदारी से काम करते हैं। वह उस रास्ते की रक्षा करता है, जिसमें उसके पवित्र लोग चलते हैं।
9 हे मेरे बेटे, मेरी बात सुनो। तब तुम समझोगे कि धार्मिकता और न्याय क्या हैं। तुम वह करना सीखोगे जो सही है और सही चुनाव करना सीखोगे।
10 अपने दिल को बुद्धि से भरने दो। और अपने प्राण को ज्ञान से प्रेम करने दो।
11 तब तुम समझदार व्यक्ति बनोगे और यह तुम्हारी रक्षा करेगा। तुम बुद्धिमान व्यक्ति बन जाओगे और यह तुम्हें बुराई से बचाएगा।
12 अगर तुम बुद्धिमान बन जाओगे तो तुम जीवन में सही दिशा चुनोगे। बुद्धि तुम्हें झूठ बोलने वाले व्यक्ति से बचाएगी।
13 अगर तुम समझदार व्यक्ति बन जाओगे तो यह तुम्हें उन लोगों से बचाएगा, जिन्होंने जीवन में गलत रास्ता चुना है और अन्धकार के मार्गों में चलते हैं।
14 बुद्धि तुम्हें उन से बचाएगी, जो बुराई करने में खुश होते हैं और उलट फेर के काम में आनन्द लेते हैं।
15 चरित्रहीन जीवन जीने वाले व्यक्ति को समझ में नहीं आता कि यह उसे कहाँ ले जाएगा।
16 अगर पराई स्त्री चिकनी चुपड़ी बातें और मीठे शब्द बोले तो तुम्हें बुद्धिमान व्यक्ति की तरह व्यवहार करना होगा ताकि वह तुम्हें लुभा न सके।
17 जब वह जवान थी तब उसने शादी की। लेकिन अब उसने अपने पति को छोड़ दिया। और जो वादा उसने परमेश्वर के सामने अपने पति से किया, उसे उसने तोड़ दिया।
18 चरित्रहीन औरत के घर में प्रवेश करने वाला व्यक्ति नाश होगा और कब्र में जाएगा।
19 जो ऐसी औरत के साथ रिश्ता बनाएगा वह जीवन के सही रास्ते पर नहीं लौट पाएगा।
20 सही काम करने वाले लोगों के उदाहरण का अनुसरण करो। परमेश्वर पर विश्वास करने वाले लोगों की तरह जियो।
21 याद रखो कि सिर्फ़ परमेश्वर पर विश्वास करने वाले ही इस धरती पर जीवित रहेंगे। और ईमानदारी से काम करने वाले ही इस में बने रहेंगे।
22 और नीच लोग धरती पर नाश हो जाएंगे। और जो बुराई की योजनाएँ बनाते हैं वे पूरी तरह से मिटाए जाएंगे।

अध्याय 3

1 हे मेरे बेटे, परमेश्वर के कानून को मत भूलना जो मैंने तुम्हें सिखाये थे। परमेश्वर की आज्ञाओं को अपने दिल में रहने देना।
2 तब तुम्हारा जीवन कई सालों तक चलता रहेगा। और तुम पूरी शान्ति और सफलता में जीवन बिताओगे।
3 दूसरों पर दया दिखाओ और वही करो जो सच्चाई तुम्हें सिखाती है। यह तुम्हारे जीवन को खूबसूरत बना देगा जैसे कीमती हार किसी व्यक्ति को खूबसूरत बना देता है। पत्थर पर खोदे गए शब्दों की तरह दया और सच्चाई को अपने दिल में लिख लो।
4 तब तुम्हें परमेश्वर की नज़र में अनुग्रह मिलेगा। और लोग तुम्हारा आदर करेंगे।
5 अपने सारे दिल से प्रभु पर भरोसा रखना। और अपनी समझ का सहारा न लेना।
6 हर परिस्थिति में यह समझने का हर संभव प्रयास करो कि परमेश्वर क्या करना चाहता है। और वह कदम कदम पर तुम्हारी अगुवाई करेगा।
7 अपने बारे में यह मत सोचना कि तुम हर किसी से ज़्यादा चतुर हो। प्रभु का भय मानना और बुराई से अलग होना।
8 तब तुम्हारा शरीर और तुम्हारी हड्डियाँ मजबूत बनेंगे और तुम अपनी बीमारी से चंगे हो जाओगे।
9 जो कुछ तुम्हारा है वह प्रभु को समर्पित कर दो और उसकी सेवा करो। अपनी फ़सल का पहला फल उसके पास लाओ और उसे अपने लाभ का भाग दो। इस तरह से तुम प्रभु को अपना गहरा आदर दिखाओगे।
10 तब परमेश्वर तुम्हें इतनी बहुतायत से फसल देगा कि तुम अनाज से अपने भण्डार घरों को ऊपर तक भर दोगे। और तुम्हारे पास इतने अंगूर होंगे कि तुम बहुतायत से नया दाखरस बनाओगे।
11 हे मेरे बेटे, जब प्रभु तुम्हारी गलतियों को दिखाता है तब ध्यान देना। और जब वह तुम्हें ठीक करता है तब गुस्सा मत करना।
12 प्रभु उसी को सुधारता है जिससे वह प्यार करता है। वह व्यक्ति को वैसे ही ठीक करता है जैसे पिता अपने प्यारे बेटे को ठीक करता है।
13 जिसने अक्लमंदी और समझदारी से काम लेना शुरू कर दिया वह आशीषित और सुखी जीवन जिएगा।
14 बुद्धि तुम्हें चाँदी से ज़्यादा लाभ देगी। तुम्हें सोने से ज़्यादा बुद्धि से अधिक कमाई मिलेगी।
15 बुद्धि बहुमूल्य पत्थर से भी ज़्यादा कीमती है। और जिसकी भी तुम इच्छा करते हो उसकी तुलना बुद्धि से नहीं हो सकती।
16 बुद्धि अपने दाहिने हाथ में लंबे जीवन को पकड़े रहती है। बुद्धि अपने बाएं हाथ में धन-संपत्ति और महिमा को पकड़े रहती है।
17 बुद्धि के मार्ग पर चलना कितना सुहावना है। तब तुम्हारा हर कदम तुम्हारे लिए शान्ति और सफलता लाएगा।
18 जो बुद्धि की खोज करता है वह जीवन के पेड़ को खोजता है। आशीषित और सुखी जीवन जीने के लिए बुद्धि से काम करें।
19 प्रभु ने पृथ्वी को बुद्धि से बनाया और ज्ञान से स्वर्गों को फैलाया।
20 परमेश्वर जानता था कि पानी के सोते कैसे बनाए जाएं, जो ज़मीन से बाहर फूट पड़ें। उसने बादल बनाए ताकि ओस ज़मीन पर गिर सके।
21 हे मेरे बेटे, फ़ैसला लेने से पहले अच्छी तरह सोचो। अच्छी तरह से सोच समझकर और बुद्धि से काम लो।
22 यह तुम्हारे प्राण को जीवन देगा और तुम्हें कीमती हार की तरह सजाएगा।
23 तब तुम सुरक्षित रहोगे और तुम सही रास्ते से नहीं भटकोगे।
24 और जब तुम बिस्तर पर जाओगे तब डर के कारण तुम्हारी रातों की नींद खराब नहीं होगी। तुम शान्ति से सो पाओगे और मीठी नींद का आनन्द लोगे।
25 अगर नीच लोग तुम्हें धोखा देने की कोशिश करें तो न डरना और न घबराना।
26 प्रभु में भरोसा रखो। और वह तुम्हें उस जाल से बचने में मदद करेगा जो नीच लोग तुम्हारे लिए लगाते हैं।
27 अगर तुम्हारे पास जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने का मौका है तो उसकी मदद करने से इनकार मत करना।
28 अगर तुम आज अपने दोस्त की मदद कर सकते हो तो कल पर अपने अच्छे काम मत टालो।
29 जो तुम्हारे पास शांति से रहता है उस व्यक्ति के विरुद्ध कोई बुरी योजना मत बनाना।
30 अगर उसने तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाया तो बिना किसी कारण उसका दुश्मन मत बनना।
31 बेरहम व्यक्ति की सफलता से ईर्ष्या मत करना। और उसकी तरह से कभी काम मत करना।
32 परमेश्वर बिगडे़ हुए व्यक्ति से नफ़रत करता है। प्रभु उन लोगों के साथ बातचीत करता है जो उस पर विश्वास रखते हैं और जो सही काम करने के लिए उत्सुक रहते हैं।
33 प्रभु पाप में रहने वाले अविश्वासी के घर को श्राप देता है। लेकिन प्रभु सही काम करने के लिए उत्सुक रहने वाले विश्वासी के घर को आशीष देता है।
34 प्रभु उन लोगों की हंसी उड़ाएगा जो उसकी हंसी उड़ाते हैं। और वह अपना अनुग्रह उसी को देगा जो परमेश्वर के सामने खुद को नम्र करता है।
35 जो बुद्धि से काम करता है वह अच्छी प्रतिष्ठा पाएगा। और जो मूर्खता से काम करता है वह अपने आप को शर्मिंदा करेगा।

अध्याय 4

1 हे मेरे बच्चों, अपने पिता की बात सुनो जब वह तुम्हारा उचित सुधार करता है। समझ सीखने के लिए उसके शब्दों पर ध्यान दो।
2 मैंने तुम्हें सही बातें सिखाई हैं, परमेश्वर के कानून को मत भूलना।
3 जब मैं बच्चा था तब मेरा भी पिता था, जो मुझसे बहुत प्यार करता था। और मेरी माँ ने मुझे अपने इकलौते बेटे की तरह माना।
4 मेरे पिता ने मुझसे कहा, “तुम्हारा दिल मेरे शब्दों को याद रखे। मैं तुम्हें आज्ञाओं को सिखाता हूँ ताकि तुम सुखी जीवन जी सको।
5 समझदारी सीखने के लिए बुद्धि को ढूँढो। इसके बारे में भूल मत जाना और मेरे शब्दों को अनदेखा मत करना।
6 जो बुद्धि कहती है उसको अनदेखा मत करो तब वह तुम्हारी रक्षा करेगी। बुद्धि से काम करो तब वह तुम्हारी रखवाली करेगी।
7 बुद्धि को खोजें, क्योंकि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ बुद्धि है। समझ के साथ कैसे काम करना है यह सीखने के लिए हर संभव प्रयास करें।
8 किसी भी चीज़ से अधिक बुद्धि को बहुमूल्य समझना और यह तुम्हें महान बनाएगी। बुद्धि के साथ एक हो जाना तब लोग तुम्हारा आदर करेंगे।
9 बुद्धि अनुग्रह को सुंदर माला की तरह तुम पर रखेगी। बुद्धि शानदार मुकुट से तुम्हें सजाएगी।”
10 हे मेरे बेटे, मेरी बात सुनो और जो मैं कहता हूँ वह करो। तब तुम लंबा और सुखी जीवन जिओगे।
11 मैं तुम्हें सिखाता हूँ कि कैसे बुद्धिमान बनें। मैं तुम्हें बताता हूँ कि कैसे सही तरीके से जीवन जीना है।
12 जब तुम कुछ करना शुरू करोगे तब कुछ भी तुम्हें रोकने में सफल नहीं होगा। और जब तुम्हें जल्दी से काम करने की ज़रूरत होगी तब तुम गलती नहीं करोगे।
13 जब कोई व्यक्ति तुम्हारा उचित सुधार करता है तब ध्यान देना और उन्हें अनदेखा मत करना। अपने आप को सही करो, क्योंकि यह तुम्हारे जीवन में सफलता लाएगा।
14 अपने जीवन में सही दिशा चुनना। और कभी भी अपराधी या नीच व्यक्ति की तरह काम मत करना।
15 अगर तुमने गलत रास्ते पर चलना शुरू कर दिया है तो रुको और इस रास्ते को छोड़ दो। और अगर कोई तुम्हें अपराध करने की सलाह देता है तो इसमें भाग लेने से मना कर दो।
16 अगर अपराधी कोई बुराई नहीं करेंगे तो वे सो नहीं पाएंगे। अगर वे किसी को नुकसान नहीं पहुँचाएंगे तो उन्हें नींद नहीं आएगी।
17 नीच लोग अपना जीवनयापन करने के लिए अपराध करते हैं। वे शराब के नशे में धुत होकर क्रूर बातें करते हैं।
18 सही काम करने के लिए उत्सुक रहने वाले विश्वासियों का जीवन सूरज की तरह है जो भोर को उगता है और तब तक वह और चमकदार और उज्जवल होता जाता है जब तक दोपहर की तरह धूप न हो जाए।
19 लेकिन कानून तोड़ने वालों का जीवन अन्धकार की तरह है जो तब तक घोर अंधेरा होता रहता है जब तक रात की तरह अन्धकार न हो जाए। ऐसे लोग यह नहीं देख सकते कि वे कहाँ जा रहे हैं। और वे नहीं जानते कि किस से ठोकर खाएंगे।
20 हे मेरे बेटे, मेरे शब्दों पर ध्यान दो। जो मैं कहता हूँ उसे सुनो।
21 जो मैंने तुम्हें लिखा है उसे पढ़ते रहो ताकि मेरे शब्द तुम्हारे दिल की गहराई में उतर जाएं।
22 जो मेरे शब्दों का मतलब समझता है वह पूरी तरह से स्वस्थ रहेगा और सुखी जीवन जिएगा।
23 किसी भी चीज़ से ज़्यादा इस बात पर ध्यान देना कि तुम्हारे दिल में क्या भरा है। तुम्हारा दिल स्त्रोत है और जो कुछ भी तुम्हारे जीवन में होता है वह तुम्हारे दिल से शुरू होता है।
24 झूठ मत बोलना और अपने शब्दों से दूसरों को गुमराह मत करना।
25 इस तरह से जियो कि तुम ईमानदारी से लोगों की आँखों में देख सको और शर्म के कारण अपनी आँखें न चुराओ।
26 पहले से सोच लो कि तुम्हें क्या करना चाहिए। सही दिशा में जाओ और जिस मार्ग को तुम चुनते हो उस पर शक मत करना।
27 दाहिने या बाएं ओर मत मुड़ना। और उन जगहों पर मत जाना जहाँ दूसरे लोग बुराई करते हैं।

अध्याय 5

1 हे मेरे बेटे, मेरे ज्ञान की बातों पर ध्यान दो और मेरी बुद्धि की सलाहों को सुनो।
2 तब तुम समझदार व्यक्ति बन जाओगे और तुम योग्यता के साथ बोलोगे।
3 चरित्रहीन औरत के शब्द शहद की तरह मीठे होते हैं और ख़ुशबूदार तेल की तरह सुहावने होते हैं।
4 लेकिन अगर वह तुम्हें लुभाएगी तो तुम उसके परिणाम से बच नहीं पाओगे। तुम्हें इतना बुरा लगेगा जैसे तुम्हें ज़हर दिया गया हो। यह तुम्हें ऐसे चोट पहुँचाएगा जैसे कि तुम तेज तलवार से घायल किए गए हो।
5 चरित्रहीन औरत मौत की तरफ जाती है और धीरे धीरे वह नरक के और पास आ जाती है।
6 वह अपने जीने के तरीके के बारे में नहीं सोचती। और वह चिन्ता नहीं करती कि उसके जीवन का कोई लक्ष्य नहीं।
7 हे मेरे बेटे, इसलिए मेरी बात सुनो और जो मैं तुमसे कह रहा हूँ उसे मत भूलना।
8 चरित्रहीन औरत से दूर रहना और उसके घर के दरवाज़े के पास भी मत जाना।
9 लेकिन अगर तुम उसके साथ रिश्ता बनाओगे तो तुम लोगों से आदर खो दोगे और तुम्हारा जीवन कष्ट में बदल जाएगा।
10 ऐसी औरतों पर अपना जीवन बर्बाद मत करना। नहीं तो, जो कुछ भी तुम कमाते हो वह तुम उन्हें दे दोगे।
11 बीमारी तुम्हारे शरीर को खा जाएगी। तुम अपनी सेहत को खो दोगे और तुम दर्द से पीड़ित रहोगे।
12 तब तुम कहोगे, “जब मुझे दूसरों ने सुधारा तब मुझे उनकी बात सुननी चाहिए थी। जब मेरी अंतरात्मा ने मुझे रोकने की कोशिश की तब मुझे इस पर ध्यान देना चाहिए था।
13 मैं उन लोगों की बात सुनना ज़्यादा पसंद करूँगा जिन्होंने मुझे सही काम करना सिखाया। मैं उन लोगों की बातों पर ज़्यादा ध्यान दूँगा जिन्होंने सच्चाई के रास्ते पर मेरी अगुवाई की।
14 और अब मेरे आस-पास हर कोई देख सकता है कि मैंने कितनी जल्दी अपना जीवन बर्बाद कर लिया।”
15 अपनी पत्नी के प्रति वफ़ादार रहना। अपने ही कुएँ से पानी पीना जो हमेशा ताजे पानी से भरा रहता है।
16 उन औरतों के साथ रिश्ता मत बनाना जो खुद को सड़कों और शहर के चौकों में सौंप देती हैं। ऐसे गंदे नाले से पानी न पीना।
17 तुम्हें सिर्फ़ अपनी पत्नी से संबंध रखना चाहिए और तुम्हारे पास दूसरी औरतें नहीं होनी चाहिए।
18 अपनी पत्नी का आनन्द लेना जो तुम्हारी जवानी से ही तुम्हारी है। वही तुम्हारे लिए आशीषों का सोता बनी रहे।
19 तुम्हारी पत्नी प्यारे हिरण की तरह कोमल है। वह सुंदर पहाड़ी बकरी की तरह सुंदर है। और तुम हमेशा उसकी बाहों में प्यार का आनन्द ले सकते हो।
20 हे मेरे बेटे, चरित्रहीन औरत के प्यार में मत पड़ना। तुम खुद को उसकी बाहों में क्यों फेंकोगे?
21 प्रभु एक व्यक्ति के सभी कामों को देखता है। वह हर बात पर ध्यान देता है जो व्यक्ति करता है।
22 अगर कोई बुराई करेगा तो वह अपने कामों से कष्ट भोगेगा। वह व्यक्ति अपने अपराधों से अपने ही जीवन को नाश कर देगा। और उसके पाप उसे लोहे की जंजीरों की तरह कसकर पकड़ लेंगे।
23 नीच व्यक्ति मर जाएगा क्योंकि वह अपना जीवन बदलना नहीं चाहता। वह सही रास्ते से भटक गया है और बहुत सारे जंगली काम करता है।

अध्याय 6

1 हे मेरे बेटे, तुमने अपने दोस्त के कर्ज को चुकाने का वादा क्यों किया? तुमने किसी दूसरे व्यक्ति के धन की जिम्मेदारी अपने ऊपर क्यों ली?
2 जब तुम किसी और के कर्ज को चुकाने के लिए सहमत हुए तब तुमने खुद को अपने ही शब्दों में फंसा लिया।
3 हे मेरे बेटे, तुमने खुद को दूसरे व्यक्ति के अधिकार में दे दिया है। इसलिए मेरी सलाह को सुनो। अपने उस दोस्त के पास जाओ जिसका कर्ज तुमने चुकाने का वादा किया है और उसके सामने घुटने टेको। तब तक उससे विनती करो जब तक वह तुम्हें उन जिम्मेदारियों से आज़ाद न कर दे, जो तुमने अपने ऊपर ली हैं।
4 सारी शाम और सारी रात उससे विनती करो, जब तक वह मान न जाए।
5 जैसे हिरण शिकारी से दूर भागता है वैसे ही किसी दूसरे का कर्ज चुकाने से अपने आप को बचाए रखना। जाल में फंसे पक्षी की तरह अपने आप को आज़ाद कर लेना।
6 हे आलसी, चींटियों के पास जाओ। उनके कामों को देखो और उनसे बुद्धि से व्यवहार करना सीखो।
7 चींटी के पास कोई अगुवा या नेता नहीं होता। और कोई भी चींटियों को काम करने के लिए मजबूर नहीं करता।
8 लेकिन वे पूरी गर्मियों में फ़सल कटने तक और सर्दियों के लिए खाना इकट्ठा करने के लिए काम करती हैं।
9 हे आलसी, तुम इतनी देर से क्यों उठ रहे हो? तुम कब जागोगे और अपने बिस्तर से उठोगे?
10 बिस्तर में पड़े रहना और यह सोचना बंद करो, “अगर मैं थोड़ा और सो लेता हूँ और छोटी सी झपकी लेता हूँ तो यह ठीक है। अगर मैं कुछ नहीं करता और थोड़ा और आराम करता हूँ तो यह ठीक है।”
11 लेकिन अगर तुम आलसी बने रहोगे तो गरीबी तुम पर लुटेरे की तरह हमला करेगी। और सभी तरह की समस्याएँ तुम पर डाकू की तरह आ पड़ेंगी।
12 झूठ फैलाने वाला व्यक्ति घिनौने और नीच तरीके से काम करता है।
13 अपनी आँखों की हरकतों से, जिस तरह से वह चलता है और जिस तरह से वह इशारे करता है, इनसे वह खुद को प्रकट करता है।
14 वह अपने दिल में नीचता छुपाए रखता है। वह दूसरों के लिए मुसीबतें खड़ी करने के लिए हमेशा तैयार रहता है ताकि उनमें झगड़ा भड़के।
15 इसलिए अचानक कोई मुसीबत उस पर आ पड़ेगी। और वह अचानक बिना चंगाई की उम्मीद लिए हुए नाश हो जाएगा।
16 छह चीजों से प्रभु नफ़रत करता है, यहाँ तक कि उसका प्राण सात चीजों से घृणा करता है।
17 प्रभु को घृणा होती है जब कोई व्यक्ति दूसरे की निंदा करता है। प्रभु को घृणा होती है जब लोग झूठ बोलते हैं। जब कोई निर्दोष व्यक्ति की हत्या करता है तब परमेश्वर इससे नफ़रत करता है।
18 प्रभु को घृणा होती है जब लोग अपने दिलों में बुरी योजनाएँ रखते हैं। उसे घृणा होती है जब कोई व्यक्ति अपराध करने के लिए बेसब्र होता है।
19 परमेश्वर नफ़रत करता है जब कोई झूठी गवाही देता है। उसे घृणा होती है जब कोई व्यक्ति भाइयों के बीच नफ़रत पैदा करता है।
20 हे मेरे बेटे, उन आज्ञाओं को मानना, जिनके बारे में तुम्हारे पिता ने तुम्हें बताया था। और जब तुम्हारी माँ तुम्हें परमेश्वर का नियम सिखाती है तब उन्हें अस्वीकार मत करना।
21 अगर आज्ञाएँ हमेशा तुम्हारे दिल में बनी रहेंगी तो वे तुम्हें बहुमूल्य हार की तरह सजाएंगी।
22 जब तुम कुछ करना शुरू करते हो तब ये आज्ञाएँ सही फैसले लेने में तुम्हारी मदद करेंगी। जब तुम बिस्तर पर जाओ तब वे तुम्हें बेचैन करने वाले विचारों से बचाएंगी। और जब तुम उठोगे तब तुम आज्ञाओं पर ध्यान लगाओगे।
23 आज्ञा दीपक की तरह तुम्हारे जीवन के मार्ग को प्रकाशित करेगी। परमेश्वर का कानून तुम्हारे जीवन में धूप जैसा तेज प्रकाश लाएगा। जो उचित सुधारों पर ध्यान देता है और खुद को बेहतर बनाता है वह सुखी जीवन जिएगा।
24 चरित्रहीन औरत तुम से मीठी बातें करेगी। लेकिन अगर तुम आज्ञाएँ मानोगे तो वह तुम्हें लुभा न सकेगी।
25 उसके शरीर की सुंदरता की चाह मत करना और उसकी आँखों की सुंदरता में फंस मत जाना। वासना भरी इच्छाओं को अपने दिल में मत भरने देना।
26 चरित्रहीन औरत आदमी को गरीब बना देगी और उसे पूरी तरह से तोड़ कर छोड़ देगी। और जो पराई स्त्री के साथ रिश्ता बनाता है वह अपने जीवन से इसकी कीमत चुकाएगा।
27 अगर कोई व्यक्ति अपने कपड़ों के अन्दर आग रखेगा तो उसके कपड़े जल जाएंगे।
28 अगर कोई व्यक्ति जलते हुए अंगारों पर चलेगा तो वह अपने पैरों को जला लेगा।
29 और अगर कोई पराई स्त्री के साथ सोएगा तो वह आग से खेलेगा और सजा पाएगा, जिसका वह हकदार है।
30 जब चोर खाने के लिए चोरी करता है तब कोई भी उस भूखे चोर को माफ़ नहीं करता।
31 और अगर लोग उसे पकड़ेंगे तो उसे चुराए हुए का सात गुना वापस करना पड़ेगा। जो कुछ उसने चुराया है उसके लिए उसे सब कुछ दे देना होगा।
32 और जो किसी औरत के साथ प्रेम संबंध शुरू करता है उसमें समझ नहीं। जो पराई स्त्री के साथ सोता है वह खुद को नाश कर देगा।
33 लोग उसकी पिटाई करेंगे और उसे शर्मिंदा करेंगे। और वह कभी भी अपने सम्मान को वापस नहीं पाएगा।
34 जब उसके पति को पता चलेगा कि उसकी पत्नी ने उसे धोखा दिया है तब वह क्रोध से भर जाएगा। जलन रखने वाला पति उस आदमी को नहीं छोड़ेगा, जिसका उसकी पत्नी के साथ प्रेम संबंध था। वह अपने अपराधी से बदला लेने के लिए कुछ भी करेगा।
35 और अगर उसका अपराधी भरपाई करने की कोशिश करेगा तो सबसे बड़ा धन भी उस गुस्से वाले पति को शांत नहीं कर पाएगा।

अध्याय 7

1 हे मेरे बेटे, जैसा मैं तुम्हें बताता हूँ वैसा ही करो। और उन आज्ञाओं को मत भूलना जो मैंने तुम्हें सिखाई हैं।
2 उन्हें मत तोड़ना और तुम सुखी जीवन जीओगे। परमेश्वर के कानून का पालन करना क्योंकि यह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि अच्छी दृष्टि होना।
3 आज्ञाओं को मानना और यह तुम्हारे जीवन को सुंदर बनाएगी जैसे कीमती अंगूठियाँ किसी व्यक्ति को सुंदर बनाती हैं। पत्थर पर खोदे गये शब्दों की तरह आज्ञाओं को अपने दिल में लिख लो।
4 बुद्धि की ओर मुड़ो और कहो, “मैं अपनी बहन की तरह तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ।” समझ की ओर मुड़ो और कहो, “मैं अपने करीबी दोस्त की तरह तुम्हें सराहता हूँ।”
5 तब बुद्धि और समझ तुम्हें चरित्रहीन औरत से बचाएंगे। और वह अपने मीठे शब्दों से तुम्हें लुभा नहीं पाएगी।
6 एक बार मैं घर पर था और खिड़की की जाली से देख रहा था।
7 मैंने भोले-भाले जवानों की मण्डली को देखा और उन के बीच एक मूर्ख जवान पर ध्यान दिया।
8 उसने चौराहे को पार किया और चरित्रहीन औरत के घर की ओर चला।
9 अंधेरा हो चला था जब शाम रात और अंधकार में बदल गयी।
10 तब एक औरत, जो बेशर्मों जैसे कपड़े पहने हुए थी, लुभाने के लिए जवान आदमी के पास आई।
11 वह हमेशा से ऊँचे शब्द से बोलने वाली और विद्रोही है। और वह कभी घर पर नहीं टिकती।
12 वह गलियों में, चौराहों पर और हर एक कोने पर उन लोगों को ढूँढती है जिन्हें लुभाया जा सकता है।
13 उस ने जवान आदमी को पकड़ा और उसे चूमना शुरू कर दिया। और बिना किसी शर्म के उसने उससे कहा,
14 “मैंने भगवान से जो वादा किया था उसे पूरा किया। इसलिए आज मैं मन्दिर गई जहाँ मैंने भगवान को अपनी शांति बलि चढ़ाई। और अब मेरे पास घर पर बहुत सारा बचा हुआ खाना है जो बलिदान के बाद बच गया है।
15 इसलिए मैं किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढने के लिए बाहर आयी जिसके साथ मैं आनन्द मना सकूँ। और तुम बिल्कुल वही हो जिसे मैं ढूँढ रही थी।
16 मैंने अपने बिस्तर पर मिस्र के खूबसूरत कंबल बिछाए हैं और अपने सोने वाले कमरे को कालीनों से सजाया है।
17 मैंने अपने सोने वाले कमरे को लोबान, अगर और दालचीनी से खुशबूदार बनाया है।
18 मेरे पास आओ! हम सुबह तक खेलेंगे और प्यार का आनन्द लेंगे।
19 सिर्फ़ मैं घर पर हूँ और कोई भी नहीं, क्योंकि मेरा पति लंबे समय से व्यापार यात्रा पर गया है।
20 वह अपने साथ बहुत पैसा ले गया और महीने के अंत में ही घर लौटने का वादा किया था।”
21 उसने अपने मीठे शब्दों से जवान आदमी को ललचाया और अपने कोमल होंठों से उसे लुभा लिया।
22 और वह उसी घड़ी उसके पीछे हो लिया एक बैल की तरह जो नहीं समझता कि वह कसाई के पास जाता है। वह हिरण की तरह उसके पीछे हो लिया जिसे पता नहीं कि वह जाल की ओर भाग रहा है।
23 जल्द ही उसे हिरण की तरह गोली मार दी जाएगी। और वह नहीं जानता कि एक तीर उसके दिल को छेद देगा। वह ऐसे पक्षी की तरह था जिसने खुद को जाल में फेंक दिया, यह महसूस किए बिना कि यह उसे नाश कर देगा।
24 इसलिए, हे मेरे बेटे, मेरी बात सुनो और जो मैं तुमसे कहता हूँ उस पर ध्यान दो।
25 किसी चरित्रहीन औरत से प्यार मत करना। अपना दिल उसे मत देना और उससे बहुत दूर रहना।
26 उसने बहुत दुख दिये और बहुत से मजबूत आदमियों के जीवन को पूरी तरह से नाश कर दिया।
27 चरित्रहीन औरत के घर में प्रवेश करने वाला उस मार्ग में प्रवेश करेगा जो उसे नरक की ओर ले जाएगा। उसके सोने के कमरे में जाने वाला नाश हो जाएगा।

अध्याय 8

1 क्या तुम सुनते हो कि बुद्धि कैसे लोगों से ज़ोर से बोलती है? क्या तुम सुनते हो कि समझ कैसे सभी को अपने पास आने के लिए बुलाती है?
2 बुद्धि पहाड़ी की चोटियों पर, सड़क के किनारे और चौराहों पर खड़ी रहती है।
3 बुद्धि ज़ोर से उन लोगों से बोलती है जो शहर में प्रवेश करते हैं और फाटक से होकर चले जाते हैं।
4 बुद्धि कहती है, “हे लोगों, मैं तुम्हें पुकारती हूँ ताकि तुम मेरे पास आओ! जो मैं तुमसे कहना चाहती हूँ, उसे सुनो।
5 तुम, जिसके पास ज्ञान नहीं, अक्‍लमंदी से सोचना सीखो। और तुम, मूर्खों, बुद्धिमान बनो।
6 मेरी बात सुनो, क्योंकि मैं उन चीजों के बारे में बात करूँगी जो महत्वपूर्ण और सही हैं।
7 मुझे सच बोलना पसंद है और मुझे झूठ से नफ़रत है।
8 मेरे सभी शब्द सच्चे हैं। मैंने कभी किसी को धोखा नहीं दिया और न ही गुमराह किया।
9 समझदार व्यक्ति मेरी हर बात का मतलब समझ सकता है, जो मैं कहती हूँ। और जिसने ज्ञान पाया वह जाँच लेगा कि मेरे शब्द सच्चे हैं।
10 जब मैं तुम्हें सिखाती हूँ तब ध्यान से सुनो। चाँदी से ज़्यादा मेरी शिक्षा की प्रशंसा करो। ज्ञान प्राप्त करो, क्योंकि यह शुद्ध सोने से बेहतर है।
11 बुद्धि गहनों से ज़्यादा कीमती है। तुम बुद्धि की तुलना ऐसे किसी धन से नहीं कर सकते, जिसे तुम पाना चाहते हो।
12 मैं बुद्धि हूँ। यही कारण है कि मैं अक्‍लमंदी और शुद्ध सोच को दिखाती हूँ। और मेरे पास ज्ञान की भरपूरी है।
13 मैं बुद्धि हूँ। और मुझे नफ़रत होती है जब कोई व्यक्ति दूसरों को घमंड और अहंकार से देखता है। जब लोग अपराध करते हैं तो इससे मुझे घृणा होती है। मुझे नफ़रत होती है जब कोई व्यक्ति दूसरों को गुमराह करने के लिए झूठ बोलता है। इसलिए जो प्रभु का भय मानता है उसे बुराई से नफ़रत करनी है।
14 मैं ऐसी सलाह देती हूँ, जो सफलता लाती है। मैं जानती हूँ कि किसी व्यक्ति को बुद्धिमान और मजबूत कैसे बनाया जाए।
15 मैं राजाओं को उनके देश पर अच्छी तरह से राज्य करना सिखाती हूँ। मैं सरकार को न्यायपूर्ण कानून बनाने के लिए बुद्धि देती हूँ।
16 मैं राज्यपालों, शासकों और पृथ्वी के न्यायियों को उनके लोगों की सही दिशा में अगुवाई करने में मदद करती हूँ।
17 मैं बुद्धि हूँ। मैं उनसे प्यार करती हूँ जो मुझसे प्यार करते हैं। और जो मुझे ढूँढता है वह मुझे पाएगा।
18 मेरे पास धन, महिमा और धार्मिकता है। मेरे पास वह खजाना है, जो कभी नाश न होगा।
19 और जो मुझे ढूँढने के लिए उत्सुक रहता है वह ऐसा इनाम पाएगा, जो चोखे सोने से बेहतर होगा। मैं उसे ऐसा इनाम दूँगी, जो शुद्ध चाँदी से ज़्यादा कीमती होगा।
20 मैं सही काम करती हूँ और न्यायपूर्ण फैसले करती हूँ।
21 जो बुद्धि से प्यार करते हैं उन्हें धन विरासत में मिलेगा। और मैं उनके घरों को बहुमूल्य चीज़ों से भर दूँगी।
22 प्रभु के दुनियाँ को बनाने से भी पहले उस के पास बुद्धि थी।
23 मैं बुद्धि हूँ। परमेश्वर के पृथ्वी को बनाने से भी पहले, मैं मौजूद थी।
24 परमेश्वर के गहरे समुद्रों को बनाने से पहले और झरनों में पानी भरने से भी पहले, मैं पैदा हुई।
25 परमेश्वर के पहाड़ों और पहाड़ियों को बनाने से भी पहले, मैं पैदा हुई।
26 परमेश्वर के धरती, खेतों और संसार की पहली धूल के कण बनाने से भी पहले, मैं पैदा हुई।
27 जब परमेश्वर ने आकाश को फैलाया तब मैं वहाँ थी। मैंने देखा कि उसने क्षितिज की रेखा कैसे खींची जहाँ आकाश बहुत गहरे महासागर से मिलता है।
28 जब परमेश्वर ने आकाश को बादलों से भर दिया तब मैं वहाँ थी। मैंने देखा कि पृथ्वी के नीचे क्या हो रहा था जब परमेश्वर ने पानी से भूमिगत सोतों को भरा।
29 जब परमेश्वर ने समुद्र को आज्ञा दी कि वह अपने किनारों से बाहर न आए तब मैं वहाँ थी। मैंने देखा जब उसने पृथ्वी का आंतरिक ढांचा बनाया।
30 मैं परमेश्वर के साथ थी और मैंने कारीगर की तरह उसकी योजनाओं को पूरा किया। हर दिन मैंने परमेश्वर को आनन्द दिया और हर समय मैं उसकी उपस्थिति में खुशी से हँसी।
31 जब परमेश्वर ने पृथ्वी और पहले परिवार को बनाया तो मैं कितनी उत्साहित थी!
32 हे लोगों, मेरी बात सुनो। जो बुद्धि से काम करता है वह आशीषित और सुखी जीवन जिएगा।
33 जब मैं तुम्हारा उचित सुधार करती हूँ तब मेरी बात सुनो और उनको अस्वीकार मत करो। तब तुम बुद्धिमान बन जाओगे।
34 जो हर दिन मेरे घर के दरवाज़े पर मुझे देखने का इंतजार करता है और जो मुझे सुनने के लिए मेरे दरवाज़े से बाहर आने का इंतेज़ार करता है वह आशीषित और सुखी जीवन जिएगा।
35 मैं बुद्धि हूँ। और जो मुझे पाएगा वह ऐसा जीवन जिएगा, जो प्रभु के लिए आनन्द लाएगा।
36 और जो मुझे नहीं ढूँढता, वह खुद को नुकसान पहुँचाएगा। जो मुझसे नफ़रत करता है वह मौत से प्यार करता है।”

अध्याय 9

1 बुद्धि ने अपना घर बनाया और वहाँ सात पत्थर के खम्भे खड़े किए।
2 उसने बहुत सारा स्वादिष्ट भोजन और पेय तैयार किए। उसने आनन्द मनाने के लिए मेज़ पर अपना भोजन रखा।
3 बुद्धि ने अपने मदद करने वालों को शहर के सबसे ऊँचे स्थानों पर जाने और लोगों को बुलाने के लिए भेजा,
4 “जिनके पास ज्ञान नहीं, यहाँ आओ!” बेवकूफी से काम करने वालों से बुद्धि ने कहा,
5 “मेरे पास आओ! मेरी रोटी खाओ और जो मैंने तुम्हारे लिए तैयार किया है उसे पी लो।
6 बेवकूफी के काम करना बंद करो। सुखी जीवन जीने के लिए अक्लमंदी से काम लेना सीखो।”
7 अगर तुम उसका उचित सुधार करोगे जो अपने भद्दे मज़ाक से दूसरों को नाराज़ करता है तो वह बदले में तुम्हारा अपमान करेगा। और अगर तुम नीच व्यक्ति को ठीक करने की कोशिश करोगे तो तुम खुद को नुकसान पहुँचाओगे और मुसीबत में पड़ जाओगे।
8 जो दूसरों को नाराज़ करता है उसे मत सुधारना, क्योंकि इससे तुम्हें एक ऐसा दुश्मन मिलेगा, जो तुमसे नफ़रत करेगा। लेकिन अगर तुम बुद्धिमान व्यक्ति को ठीक करोगे तो तुम एक ऐसे दोस्त को पाओगे, जो तुमसे प्यार करेगा।
9 अगर तुम बुद्धिमान व्यक्ति को सिखाओगे तो वह और बुद्धिमान हो जाएगा। और अगर तुम ऐसे व्यक्ति को सलाह दोगे जो सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है तो वह तुम्हारी बात सुनेगा।
10 जो प्रभु का भय मानता है वह समझने लगेगा कि बुद्धि क्या है। और जो पवित्र परमेश्वर को जानने के लिए उत्सुक रहता है वह समझदारी से काम करना सीखेगा।
11 अगर तुम बुद्धि से व्यवहार करोगे तो परमेश्वर तुम्हारे जीवन में कई दिन और साल जोड़ देगा।
12 जो बुद्धि से काम करता है वह सफल इंसान बनेगा। और जो बुद्धि का मज़ाक उड़ाता है और बेवकूफी से व्यवहार करता है वह अपने जीवन को नाश कर देगा।
13 मूर्खता शोर मचाने वाली और बेवकूफ औरत की तरह है, जो कुछ भी नहीं जानती।
14 वह अपने घर के दरवाज़े पर कुर्सी पर बैठती है। वह लोगों तक पहुँचने के लिए शहर के सबसे ऊँचे स्थानों पर भी जाती है।
15 वह उन लोगों को बुलाती है, जो पास से गुज़रते हैं। वह उन लोगों को उलझाने के लिए उनकी ओर मुड़ जाती है, जो अपने कारोबार के लिए जाते है।
16 वह उनसे कहती है, “जिनके पास ज्ञान नहीं, यहाँ आओ!” वह बेवकूफी से काम करने वालों से कहती है,
17 “चोरी करना मीठे पानी के जितना ही अच्छा है। धोखा देना स्वादिष्ट भोजन जितना ही आनन्दमय है।”
18 जो उस घर में प्रवेश करता है जहाँ मूर्खता रहती है वह नाश हो जाएगा। लेकिन मूर्ख व्यक्ति इसे समझ नहीं पाता। यही कारण है कि वह बेवकूफी की सलाह को सुनता है और सीधे नरक में जाता है।

अध्याय 10

1 यह किताब राजा सुलैमान की बुद्धि की बातों का संग्रह है। जो बेटा बुद्धि से काम करता है वह अपने पिता को आनंदित करता है। लेकिन जो बेटा बेवकूफी से काम करता है वह अपनी माँ को दुःखी करता है।
2 गैरकानूनी तरीकों से धन कमाने वाला व्यक्ति मुसीबत में पड़ेगा और अपने जीवन को खतरे में डालेगा। लेकिन ईमानदारी से काम करने वाला व्यक्ति सुरक्षित रहेगा।
3 अगर नीच लोग विश्वासी के जीवन को बर्बाद करने की योजना बनाएंगे तो प्रभु उन योजनाओं को नाश कर देगा। परमेश्वर ऐसे व्यक्ति का ध्यान रखेगा जो उस पर विश्वास करता है ताकि वह व्यक्ति भूख से परेशान न हो।
4 जो आलसी होना पसन्द करता है वह बर्बाद हो जाएगा। और जो काम करना पसन्द करता है वह अमीर हो जाएगा।
5 मेहनती बेटा कटनी के समय फसल इकट्ठा करता है। लेकिन आलसी बेटा सोता रहता है और अपने परिवार को शर्मिंदा करता है।
6 एक विश्वासी जो सही बोलने और सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है उसे बहुत आशीषें मिलेंगी। और नीच व्यक्ति जो झगड़े के बारे में बोलता और क्रूरता से काम करता है वह अपने जीवन को नाश कर लेगा।
7 जब लोग उस विश्वासी के बारे में सोचते हैं जो सही काम करने के लिए उत्सुक रहता था तो वे उसके नाम को आशीर्वाद देते हैं। और जब लोग नीच व्यक्ति के नाम का ज़िक्र करते हैं तो उन्हें घृणा होती है।
8 बुद्धिमान दिल का व्यक्ति आज्ञाओं को सुनता और सफल होता है। लेकिन मूर्ख किसी की बात नहीं सुनता। वह बकवास की बातें बोलता है और अपने जीवन को नाश कर देता है।
9 जो ईमानदारी से काम करता है वह सफलता और शांति से जिएगा। और जो धोखाधड़ी में लगा रहता है वह पकड़ा जाएगा और सज़ा पाएगा।
10 बुराई करने का इरादा रखने वाला व्यक्ति अपने साथियों को अपनी आँखों से गुप्त इशारे करता है। लेकिन आज नहीं तो कल, वह कुछ बेवकूफी भरी बात कहेगा और उसकी पोल खुल जाएगी।
11 जब सही काम के लिए उत्सुक रहने वाला विश्वासी बोलता है तब उसके शब्द जीवन देने वाले सोते की तरह बहते हैं। लेकिन जब नीच व्यक्ति बोलता है तब वह झगड़ा भड़काता है और लोगों के जीवनों को नाश करता है।
12 जो नफ़रत से भरा है वह माफ़ नहीं करना चाहता और झगड़े शुरू करता है। और जो प्रेम से भरा है वह अपराधों को माफ़ करता है और झगड़े मिटाता है।
13 अक्‍लमंद व्यक्ति जानता है कि शांति लाने के लिए बुद्धि के साथ कैसे जवाब दिया जाए। लेकिन मूर्ख ऐसे शब्दों के साथ जवाब देता है कि उसे अपनी पीठ पर छड़ी से मार खानी पड़ती है।
14 बुद्धिमान व्यक्ति योग्यता के साथ बोलता है और दूसरों की समस्याओं को हल करने में उनकी मदद करता है। लेकिन मूर्ख के पास कोई ज्ञान नहीं होता और उसकी सलाह मुसीबत लाती है।
15 अमीर व्यक्ति के लिए उसकी सम्पत्ति गढ़ वाले किले की तरह है। वह अपने धन का सहारा लेता है, जो उसे मुसीबत से बचाता है। लेकिन गरीब गरीबी में रहता है, जो उसका जीवन बर्बाद कर देती है।
16 विश्वासी ईमानदारी से कमाता है और अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है। लेकिन नीच व्यक्ति गैरकानूनी तरीकों से बहुत अधिक लाभ प्राप्त करता है और पाप भरे सुखों पर अपना सब कुछ खर्च कर देता है।
17 जब दूसरे किसी व्यक्ति का उचित सुधार करते हैं और वह इन पर ध्यान देता है तब वह व्यक्ति सफल हो जाएगा। लेकिन जो अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करना चाहता, वह बिना लक्ष्य के अपना जीवन बिताएगा।
18 जो अपनी नफ़रत छिपाने के लिए दूसरे व्यक्ति से चिकनी चुपड़ी बातें बोलता है वह झूठा है। और जो खुलकर अपनी नफ़रत दिखाता और झूठी निंदा फैलाता है वह मूर्ख है।
19 बिना रुके बोलने वाला मूर्ख बहुत अधिक बोलेगा। लेकिन समझ रखने वाला व्यक्ति अपनी जीभ को रोक कर रखता है।
20 विश्वासी सही बातों के बारे में सोचता है। और उसके शब्द शुद्ध चाँदी की तरह कीमती हैं। लेकिन नीच व्यक्ति पाप के बारे में सोचता है और वह दूसरों को कुछ भी अच्छा नहीं सिखा सकता।
21 अक्‍लमंदी के साथ बोलने वाले विश्वासी के शब्द बहुत से लोगों को उत्साहित करते हैं। लेकिन मूर्ख बुद्धि के शब्दों को नहीं सुनता और अपने जीवन को नाश कर देता है।
22 परमेश्वर की आशीष व्यक्ति को अमीर बनाती है और कोई परेशानी नहीं लाती।
23 मूर्ख परिणाम के बारे में नहीं सोचता और मज़ाक के लिए अपराध करता है। लेकिन समझदार व्यक्ति बुद्धि से काम करता है और कानून नहीं तोड़ता।
24 विश्वासी के सपने पूरे हो जाएंगे। और जिस बात से नीच व्यक्ति डरता है वही उसके साथ होगा।
25 तूफ़ान की तरह अचानक आने वाली तबाही नीच लोगों के जीवन को पूरी तरह से बर्बाद कर देगी। लेकिन अनन्त परमेश्वर पर विश्वास करने वाला और सही काम करने के लिए उत्सुक रहने वाला व्यक्ति परीक्षा के समय मज़बूती से खड़ा रहेगा।
26 आलसी को कोई काम मत दो। नहीं तो, वह सिरके की तरह तुम्हारे दांतों को खराब कर देगा या धुएँ की तरह तुम्हारे आँसू निकाल देगा।
27 अगर तुम प्रभु का भय मानोगे तो वह तुम्हारे जीवन में कई दिनों और सालों को जोड़ देगा। लेकिन नीच व्यक्ति अपने समय से पहले ही मर जाएगा।
28 सही काम करने के लिए उत्सुक रहने वाला विश्वासी आनन्द के साथ अपना सपना पूरा होने का इन्तज़ार करता है। नीच व्यक्ति भी सबसे अच्छी चीज़ों की आशा करता है लेकिन उसका सपना कभी पूरा नहीं होगा।
29 जो ईमानदारी से काम करता और प्रभु के पीछे चलता है वह गढ़ वाले किले की तरह सुरक्षित रहेगा। लेकिन जो कानून तोड़ता है वह समझ ले कि प्रभु उसे सज़ा देगा।
30 जो परमेश्वर पर विश्वास करता है और सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह हमेशा पूरी सुरक्षा में जीवित रहेगा। लेकिन नीच व्यक्ति का जीवन पूरी तरह से नाश हो जाएगा।
31 जब कोई विश्वासी बोलता है तब उसकी बात बुद्धि से भरी होती हैं और लोग खुशी से उसे सुनते हैं। लेकिन जब झूठा व्यक्ति बोलता है तब वह निन्दा फैलाता है और लोग उस से कहते हैं, “तुम्हारी जीभ काट दी जाए।”
32 परमेश्वर पर विश्वास करने वाला जानता है कि दूसरों से दया के साथ कैसे बात करें। लेकिन नीच व्यक्ति गुस्से से बोलता है।

अध्याय 11

1 परमेश्वर नफ़रत करता है जब कोई बेचनेवाला खरीदने वाले को धोखा देने के लिए गलत तराज़ू का इस्तेमाल करता है। लेकिन जब लोग सही तराज़ू का इस्तेमाल करते हैं और ईमानदारी से कमाते हैं तब परमेश्वर उसे पसन्द करता है।
2 जो घमण्ड से काम करता है वह मूर्ख है। ऐसा व्यक्ति मुसीबत में पड़ेगा और शर्मिंदा होगा। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति दूसरों के साथ आदर से व्यवहार करता है।
3 ईमानदार व्यक्ति हर परिस्थिति में सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है। लेकिन जब बेईमान के पास मौका होता है तब वह धोखा देता है और वह अपने कामों से अपने जीवन को बर्बाद कर लेगा।
4 जिस दिन बेईमान व्यक्ति की मौत आएगी, उस दिन उसका धन उसकी मदद नहीं कर पाएगा। लेकिन जो सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह अदालत में दोषी नहीं ठहरेगा और मौत से बच जाएगा।
5 जो ईमानदारी से जीता है वह मुसीबत में नहीं पड़ेगा। लेकिन नीच व्यक्ति को उसके बुरे कामों के अनुसार वही मिलेगा जिसका वह हकदार है।
6 जो व्यक्ति ईमानदारी से काम करता है वह अपने आप को मुसीबत से बचाएगा। लेकिन जो नीच व्यक्ति दूसरों को नुकसान पहुँचाने के लिए उत्सुक रहता है वह अपने कामों से दुख उठाएगा।
7 अपराधी अपनी बुरी योजनाओं को पूरा करने की आशा में जीता है। लेकिन वह मर जाएगा और उस बुराई को नहीं कर पाएगा, जिसे उसने करने की योजना बनाई थी।
8 जो विश्वासी सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह मुसीबत में नहीं पड़ेगा। लेकिन नीच व्यक्ति उसके बदले मुसीबत में फंस जाएगा।
9 जो परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता, वह पाखंड करता है और दूसरे व्यक्ति को धोखा देता है ताकि अपने वचनों से उसका नाश करे। लेकिन जो विश्वासी सच्चाई को जानता है और सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है, वह चिकनी चुपड़ी बातों पर विश्वास नहीं करेगा और धोखे में नहीं आएगा।
10 जब विश्वासी सफल होते हैं और अच्छे काम करते हैं तब सारा शहर आनन्दित होता है। और जब नीच लोग मरते हैं तब भी लोग अपना आनन्द छिपा नहीं सकते।
11 विश्वासी अपने शहर को आशीर्वाद देते हैं और उसे सफ़ल बनाते हैं। लेकिन नीच लोग अपने शहर को अपनी बातों से श्राप देते हैं और उसको नाश कर देते हैं।
12 दूसरों के बारे में घृणा के साथ बोलना मूर्खता है। इससे अच्छा है कि तुम समझदारी दिखाओ और चुप रहो।
13 जो व्यक्ति चुगली करना पसन्द करता है, उसे विश्वास की बातें मत बताना, नहीं तो वह तुम्हारे भेदों को प्रगट कर देगा। अपने रहस्यों को किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताना, जो इसे किसी को भी नहीं बताएगा।
14 अगर किसी देश के नेता के पास योग्य सलाहकार कम हैं तो वह देश गरीबी में रहेगा। लेकिन अगर उसके पास कई बुद्धिमान सलाहकार हैं तो उस देश के लोग सफल होंगे।
15 जो किसी दूसरे व्यक्ति के कर्ज को भरने का वादा करता है वह मुसीबत में पड़ेगा। लेकिन जो दूसरों का कर्ज अपने ऊपर लेने के खिलाफ़ है वह अपने आप को समस्याओं से बचाएगा।
16 लोग उस दयालु महिला का आदर करेंगे, जो दूसरों की मदद करती है। लेकिन जो अमीर व्यक्ति दया नहीं दिखाता वह कभी भी आदर का हकदार नहीं होगा।
17 जो दूसरों का भला करता है, उसके दिल में आनन्द होगा। लेकिन जो लोगों के साथ क्रूरता का व्यवहार करता है, उसके स्वास्थ्य को लेकर परेशानी होगी।
18 नीच व्यक्ति वह सब कुछ खो देगा, जो उसने गैरकानूनी तरीकों से प्राप्त किया। लेकिन जो ईमानदारी से कमाता है वह हमेशा बहुतायत में रहेगा।
19 जो विश्वासी सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह सुखी जीवन जिएगा। लेकिन जो अपनी बुरी योजनाओं को पूरा करने के लिए बेसब्र रहता है वह अपनी मौत की ओर जा रहा है।
20 जो लोग अनैतिक चीज़ों के लिए सोच विचार करते हैं और पाप में जीते हैं उनसे प्रभु घृणा करता है। लेकिन जो सही बातों के लिए सोच विचार करते हैं और सही काम करते हैं वे प्रभु को आनन्दित करते हैं।
21 तुम पूरी तरह से निश्चिंत हो सकते हो कि जो लोग अनैतिक जीवन जीते हैं उन्हें वह सजा मिलेगी, जिसके वे हकदार हैं। और तुम इसके लिए भी पूरी तरह से निश्चिंत हो सकते हो कि जो परमेश्वर पर विश्वास रखने वालों की संतान हैं और सही काम करने के लिए उत्सुक रहते हैं, वे उद्धार पाएंगे।
22 अगर कोई औरत सुन्दर है लेकिन मूर्ख है तो वह सुअर की नाक में सोने की नत्थ के समान है।
23 जो विश्वासी सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है और अच्छे के लिए आशा रखता है उसके सपने पूरे हो जाएंगे। जो नीच व्यक्ति अपराध करता है वह भी अच्छे की आशा करता है लेकिन उसे न्याय का सामना करना पड़ेगा।
24 एक व्यक्ति उदारता से दूसरों को बाँटता है और ज़्यादा अमीर बन जाता है। लेकिन दूसरा हमेशा बचत करता है और ज़्यादा गरीब हो जाता है।
25 जो उदारता से ज़रूरतमंद लोगों को बाँटता है वह सफल होगा। और जो प्यासे को पानी देता है उसे भी पानी दिया जाएगा।
26 जो अपने भण्डार घरों में अनाज जमा करता है ताकि जब उसका दाम बढ़ जाए तब उसे बाद में बेच दें, उसे लोग श्राप देंगे। लेकिन लोग उसे आशीर्वाद देंगे, जो अनाज को तुरंत बेच देता है और कीमत नहीं बढ़ाता।
27 जो दूसरों का भला करता है उसके जीवन में भलाई ही आएगी। लेकिन जो दूसरों को नुकसान पहुँचाता है उसके जीवन में बुराई आएगी।
28 अगर किसी व्यक्ति को अपने धन पर आशा है तो उसका जीवन उन सूखे पत्तों की तरह है, जो पतझड़ में पेड़ों से गिरते हैं। लेकिन अगर कोई व्यक्ति प्रभु पर विश्वास करता है और उस पर भरोसा रखता है तो उसका जीवन हरे पत्तों की तरह है, जो वसंत में दिखाई देते हैं।
29 जो बेवकूफी से काम करता है वह अपने परिवार को बर्बाद कर देगा और जो कुछ उसके पास है वह उसे उड़ा देगा। मूर्ख उस व्यक्ति का दास बन जाएगा, जो बुद्धिमानी से काम करता है।
30 जो परमेश्वर पर विश्वास रखता है वह अच्छे काम करता है। और उसका जीवन उस पेड़ की तरह है जिस पर फल लगते हैं, जो दूसरों को जीवन देते हैं। ऐसा व्यक्ति बुद्धि से काम करता है और लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
31 जब तक विश्वासी पृथ्वी पर जीवित रहता है उसे वह मिलेगा, जिसका वह हकदार है। और निश्चय ही, जो परमेश्वर को ठुकराता है और पाप में जीता है उसे वह मिलेगा, जिसका वह हकदार है।

अध्याय 12

1 जो सीखना पसंद करता है वह ध्यान से सुनता है जब दूसरे लोग उसका उचित सुधार करते हैं। लेकिन मूर्ख सीखना पसंद नहीं करता और वह नफ़रत करता है जब दूसरे लोग उसका उचित सुधार करते हैं।
2 प्रभु भलाई करने वालों पर कृपा करता है। लेकिन जो दूसरों को नुकसान पहुँचाना चाहता है प्रभु उसकी निंदा करता है।
3 बुरे काम करने वाले के जीवन में स्थिरता नहीं होगी। लेकिन जो परमेश्वर पर विश्वास करता है और सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह मजबूत नींव पर खड़ा होगा।
4 अगर पत्नी सही काम करती है तो वह अपने पति को मुकुट की तरह सजाएगी। लेकिन अगर वह इस तरह से व्यवहार करे कि उसका पति शर्मिंदा होता है तो वह उसे ऐसी पीड़ा देगी जैसे कि हड्डियों में दर्द हो।
5 विश्वासी ऐसी बातों के बारे में सोचते हैं कि ईमानदारी से व्यवहार कैसे करें। लेकिन नीच लोग ऐसी बातों के बारे में सोचते हैं कि दूसरों को कैसे धोखा दें।
6 अपराधी एक दूसरे से बातें करते हैं कि किसी दूसरे व्यक्ति को मारने के लिए कैसे जाल बिछाएं। लेकिन विश्वासी चर्चा करते हैं कि इस व्यक्ति के जीवन को मौत से कैसे बचाएं।
7 अगर नीच व्यक्ति पर मुसीबत आ पड़े तो वह उसके जीवन को पूरी तरह से नाश कर देगी। लेकिन अगर कोई विश्वासी मुसीबत में पड़ जाए तो उसका परिवार उस मुसीबत से गुजरेगा और मजबूत बना रहेगा।
8 लोग बुद्धिमान व्यक्ति के बारे में अच्छी बातें करेंगे। लेकिन वे उस मूर्ख से घृणा ​​करेंगे, जो अनैतिक बातों के बारे में सोचता है।
9 खाना न होने पर भी अमीर व्यक्ति होने का दिखावा करने से साधारण व्यक्ति होना और अपनी जीविका कमाना बेहतर है।
10 विश्वासी जानवरों के साथ भी भलाई करता है न केवल मनुष्यों के साथ। लेकिन नीच व्यक्ति किसी पर दया नहीं करता, क्योंकि उसका दिल क्रूरता से भरा हुआ है।
11 जो अपनी भूमि पर काम करता है वह बहुतायत का जीवन जिएगा। लेकिन जो मूर्ख सपनों का पीछा करता है और काम नहीं करना चाहता, वह गरीबी में रहेगा।
12 दूसरों के पास जो कुछ है नीच व्यक्ति उसका अधिकारी होना चाहता है। लेकिन जो विश्वासी सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह खुद कमाता है और दूसरों की मदद करता है।
13 झूठ बोलने वाला अपनी ही बातों से दु:ख उठाएगा और मुसीबत में फंस जाएगा। लेकिन विश्वासी झूठ नहीं बोलता, इसलिए वह मुसीबत से बच जाएगा।
14 व्यक्ति का जीवन उसके शब्दों और कामों पर निर्भर करता है। जो कोई व्यक्ति सही बोलता और सही काम करता है वह सुखी जीवन जिएगा।
15 मूर्ख सोचता है कि वह हमेशा वही करता है जो सही है इसलिए वह दूसरों की सलाह नहीं लेता। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति उनके पास जाता है, जो उसे सलाह दे सकते हैं।
16 जब मूर्ख का अपमान होता है तो वह तुरन्त अपना गुस्सा दिखाता है। लेकिन समझदार व्यक्ति शान्त रहता है और अपमान को अनदेखा कर देता है।
17 जो व्यक्ति ईमानदारी से काम करना पसंद करता है वह अदालत में सच बोलेगा। लेकिन बेईमान व्यक्ति झूठ बोलेगा और अदालत को गुमराह करेगा।
18 मूर्ख बोलने से पहले नहीं सोचता और वह कठोर शब्द बोलता है। वह दूसरे व्यक्ति को तलवार की तरह चोट पहुँचाता है। लेकिन बुद्धिमान के शब्दों से चंगाई मिलती है।
19 समय दिखाएगा कि कौन सच बोल रहा था और कौन झूठ बोल रहा था। झूठ का जीवन छोटा होता है। लेकिन सच हमेशा जीवित रहेगा।
20 जो झगड़ा भड़काना चाहता है ऐसे व्यक्ति का दिल बुरे इरादों से भरा रहता है। लेकिन जो शान्ति लाना चाहता है ऐसे व्यक्ति का दिल आनंद से भरा रहता है।
21 उस विश्वासी के साथ कुछ बुरा नहीं होगा जो सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है। लेकिन नीच व्यक्ति का जीवन मुसीबतों से भरा रहेगा।
22 जब कोई झूठ बोलता है तब इससे परमेश्वर घृणा करता है। लेकिन परमेश्वर को खुशी होती है जब कोई व्यक्ति सच बोलता है।
23 बुद्धिमान व्यक्ति बहुत सी बातें जानता है लेकिन वह बहुत ज़्यादा नहीं बोलता। मूर्ख कम जानता है लेकिन वह बहुत सारी मूर्खतापूर्ण बातें बोलता है।
24 जो अपने काम को अच्छी तरह से करने के लिए प्रयास करता है उसे ऊँचा पद दिया जाएगा। लेकिन जो आलसी है वह गुलाम की तरह काम करने को मजबूर होगा।
25 जो हमेशा चिन्ता करता है वह निराशा में चला जाएगा। लेकिन अगर तुम किसी व्यक्ति से भले शब्द बोलोगे तो यह उसको शान्ति और आनन्द देगा।
26 जो परमेश्वर पर विश्वास करता है और सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह दूसरे व्यक्ति को सही फैसले लेने में मदद करेगा। लेकिन जो नीच व्यक्ति की तरह जीता है वह दूसरों को सही रास्ते से भटका देगा।
27 आलसी व्यक्ति कुछ भी पूरा नहीं कर सकता। जो उसके पास है वह उसकी कदर नहीं करता। इसलिए जो उसने शिकार में पकड़ा है वह खराब हो जाएगा। लेकिन मेहनती व्यक्ति उसकी कदर करता है, जो कुछ भी उसने कमाया है इसलिए वह ज़्यादा अमीर बन जाता है।
28 जो परमेश्वर पर विश्वास करता है वह सही काम करेगा और सुखी जीवन जिएगा। लेकिन जो पाप करता है वह मौत की ओर जा रहा है।

अध्याय 13

1 बुद्धिमान बेटा अपने पिता को सुनता है जब वह उसका उचित सुधार करता है। लेकिन आज्ञा न मानने वाला बेटा ध्यान नहीं देता जब उसका पिता उसे सुधारता है।
2 व्यक्ति का जीवन उसके शब्दों पर निर्भर करता है। जो दूसरे लोगों से सही तरीके से बात करना जानता है वह सफल होगा। लेकिन जो बुरी बातें बोलता और बुराई करता है, उसके जीवन में बुराई आएगी।
3 जो बोलने से पहले सोचता है वह अपने आप को मुसीबतों से बचाएगा। लेकिन जो बोलने से पहले नहीं सोचता वह अपने जीवन को नष्ट कर देगा।
4 आलसी व्यक्ति अमीर होने का सपना देखता है लेकिन वह और गरीब हो जाएगा। लेकिन जो काम करना पसंद करता है वह सब कुछ प्राप्त कर लेगा, जो वह चाहता है।
5 जो परमेश्वर पर विश्वास करता है और सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह झूठ से नफ़रत करता है। लेकिन नीच व्यक्ति बेशर्मी से झूठ बोलता है और इस तरह से वह अपने आप को शर्मिंदा करता है।
6 जो विश्वासी सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह सीधे मार्ग से नहीं भटकेगा। लेकिन पापी व्यक्ति बुराई करता है, जो उसे नष्ट कर देगी।
7 ऐसे लोग हैं जिनके पास कुछ नहीं। लेकिन वे ऐसी छाप छोड़ने की कोशिश करते हैं जैसे कि वे अमीर हैं। और ऐसे दूसरे लोग भी हैं, जो बहुत अमीर हैं लेकिन वे साधारण तरीके से व्यवहार करते हैं।
8 अगर अमीर व्यक्ति को कोई धमकी देता है तो वह अपने जीवन के लिए धन देकर छूट सकता है। लेकिन गरीब व्यक्ति को ऐसी धमकियों का सामना कभी नहीं करना पड़ेगा।
9 विश्वासी का जीवन ज्योति और आनन्द से भरा हुआ होता है। लेकिन नीच व्यक्ति का जीवन बुझते हुए दीये की तरह अंधकारमय हो जाता है।
10 घमंडी व्यक्ति किसी से सलाह नहीं माँगता। वह झगड़े भड़काता है और लोगों के साथ रिश्तें तोड़ता है। लेकिन जो दूसरों से सलाह लेता है वह बुद्धि की सलाह पाता है और झगड़ों से बचता है।
11 जो काम नहीं करता और जल्दी अमीर हो जाता है वह अपना पैसा जल्दी ही उड़ा देगा। लेकिन जो मेहनत से काम करता है वह थोड़ा-थोड़ा करके अपनी बचत को बढ़ाएगा।
12 अगर आशा लम्बे समय तक पूरी न हो तो व्यक्ति का दिल निराश हो जाता है। लेकिन पूरी की गई इच्छा इंसान के दिल को ऐसे आनन्द से भर देती है जैसे उसने जीवन के पेड़ का फल खा लिया हो।
13 जो परमेश्वर के वचन को नज़रअंदाज़ करता है वह उसके जीवन को नष्ट कर देगा। लेकिन जो परमेश्वर की आज्ञाओं को तोड़ने से डरता है वह सफल होगा।
14 जो दूसरों को परमेश्वर का कानून सिखाता है वह बुद्धि से काम करता है। वह लोगों को जीवन के सोते तक ले जाता है और उन्हें मौत के खतरे से बचाता है।
15 बुद्धिमान और दयालु व्यक्ति से बात करना कितना अच्छा लगता है। लेकिन कोई भी नीच व्यक्ति के साथ संगति नहीं करना चाहता, क्योंकि वह दूसरों का अपमान करता है।
16 समझदार व्यक्ति योग्यता के साथ काम करता है। लेकिन मूर्ख के पास ज्ञान नहीं होता, इसलिए वह अपनी मूर्खता दिखाता है।
17 किसी लापरवाह व्यक्ति पर भरोसा मत करना, क्योंकि वह तुम्हें मुसीबत में डाल देगा। लेकिन जो जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों को पूरा करता है वह कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने का रास्ता खोजने में तुम्हारी मदद करेगा।
18 जो पढ़ना नहीं चाहता वह गरीबी में जिएगा और लोग उसे नज़रअंदाज़ करेंगे। लेकिन जो ज्ञान प्राप्त करना पसन्द करता है वह सफलता पाएगा और लोग उस व्यक्ति का आदर करेंगे।
19 व्यक्ति अपने सपने के सच होने पर पूरे दिल से आनन्द मनाता है। लेकिन मूर्ख तब आनन्द मनाता है जब वह बुराई करता है।
20 जो बुद्धिमान लोगों के साथ संगति रखता है वह बुद्धिमान बन जाएगा। लेकिन जो मूर्खों से संगति रखने में समय बिताता है वह अपना जीवन बर्बाद कर लेगा।
21 बुराई उस व्यक्ति का पीछा करेगी, जो परमेश्वर को अस्वीकार करता है और पाप में जीता है। लेकिन जो परमेश्वर पर विश्वास करता है और सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है उसका भला होगा।
22 दयालु व्यक्ति अपने नाती-पोतों के लिए भी विरासत छोड़ जाएगा। लेकिन पापी अपनी दौलत खो देगा और यह उस विश्वासी को मिल जाएगी, जो सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है।
23 गरीब व्यक्ति भी अपने खेत में भरपूर फसल पा सकता है। लेकिन अगर देश में अन्यायपूर्ण कानून होता है तो गरीब व्यक्ति अपनी गरीबी से बाहर नहीं निकल पाएगा।
24 जो अपने बेटे को सजा नहीं देता, वह अपने बेटे के जीवन को नष्ट कर देता है। लेकिन जो अपने बेटे से प्यार करता है वह उसे बचपन से ही सुधारता है और ठीक करता है।
25 जो विश्वासी सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह खाना खाएगा और संतुष्ट होगा। लेकिन नीच व्यक्ति भूखा ही रह जाएगा।

अध्याय 14

1 बुद्धिमान औरत अपने परिवार की देखभाल करती है और अपना घर बनाती है। लेकिन मूर्ख औरत अपने घर की देखभाल नहीं करती और अपने परिवार को नष्ट कर देती है।
2 जो ईमानदारी से काम करता है वह प्रभु का भय मानता है। लेकिन जो दूसरों को धोखा देता है वह परमेश्वर से घृणा ​​करता है।
3 मूर्ख घमंड के साथ बोलता है। वह अपनी बातों से इस तरह दुख उठाएगा जैसे किसी ने उसे डंडे से पीटा हो। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति अपनी बातों के कारण मुसीबत में नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह अपनी जीभ को वश में रखता है।
4 जिसके पास बैल नहीं, वह उनके पालने के लिए पैसे खर्च नहीं करता। लेकिन जिसके पास बैल हैं वह बहुत सारी भूमि जोत पाएगा और बड़ी फसल काटेगा।
5 ईमानदार व्यक्ति अदालत में सच बोलेगा। लेकिन बेईमान व्यक्ति बहुत सारे झूठ बोलेगा।
6 मूर्ख बुद्धि का मज़ाक बनाता है, इसलिए वह कभी बुद्धिमान नहीं बनेगा। समझदार व्यक्ति बुद्धि को पसन्द करता है और वह आसानी से ज्ञान प्राप्त करता है।
7 मूर्ख तुम्हें कोई बुद्धि की बात नहीं सिखा सकता। इसलिए उस पर अपना समय बर्बाद मत करना।
8 जिस व्यक्ति के पास ज्ञान है वह समझता है कि सही काम कैसे करें, इसलिए वह सही फैसला करता है। लेकिन मूर्ख सोचता है कि वह जानता है कि उसे क्या करना है, इसलिए वह बेवकूफी भरा काम करेगा।
9 जो परमेश्वर से अपने पाप के लिए माफ़ी माँगता है मूर्ख उसका मज़ाक उड़ाते हैं। लेकिन विश्वासी स्वीकार करते हैं जब कोई व्यक्ति परमेश्वर के पास आता है और अपने पापों को छोड़ देता है।
10 कोई किसी दूसरे के टूटे हुए दिल के दुख को पूरी तरह से नहीं समझ सकता। और उसी तरह से कोई भी दूसरे व्यक्ति के आनन्द को पूरी तरह से नहीं समझ सकता।
11 नीच व्यक्ति का घर नष्ट किया जाएगा। लेकिन सही काम करने के लिए उत्सुक रहने वाले विश्वासी का घर, बहुत अच्छी स्थिति में रहेगा।
12 ऐसा खतरनाक रास्ता है जो इन्सान के नज़रिये से सही लगता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस रास्ते को चुनेगा तो यह उसे मौत की ओर ले जाएगा।
13 चाहे कोई व्यक्ति खुश दिखता है तो भी उसके दिल में दुख भरा हुआ हो सकता है। और जब वह हँसना बन्द कर देगा तब वह अपने दुःखों के साथ अकेला रह जाएगा।
14 जिस व्यक्ति का दिल परमेश्वर को ठुकरा देता है उसे वह प्राप्त होगा जिसका हकदार वह अपने कामों के अनुसार है। और जिस विश्वासी ने अच्छे काम किए उसे भी वह मिलेगा जिसका वह हकदार है।
15 भोला-भाला व्यक्ति जो कुछ सुनता है उस पर विश्वास करता है और बेवकूफ़ी भरे फ़ैसले करता है। लेकिन समझदार व्यक्ति सही चुनाव करने से पहले हर स्थिति के बारे में ध्यान से सोचता है।
16 बुद्धिमान व्यक्ति मुसीबतों में पड़ने से डरता है, इसलिए वह बुराई से दूर रहता है। लेकिन मूर्ख अपने कामों के परिणाम के बारे में नहीं सोचता। वह बुराई करता है और आशा करता है कि उसके साथ कुछ भी बुरा नहीं होगा।
17 जो आसानी से गुस्सा हो जाता है और कुछ बेवकूफी करता है लोग उसे माफ़ कर सकते हैं। लेकिन वे उससे नफ़रत करेंगे, जो जानबूझकर दूसरों को नुकसान पहुँचाता है।
18 मूर्ख ज्ञान को पसन्द नहीं करता, इसलिए वह मूर्खता विरासत में पाएगा। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करने के लिए उत्सुक रहता है जो उसे ताज की तरह सजाएगा।
19 जो बुराई करता है वह अपनी हार मान लेगा और भलाई करने वाले का अनुग्रह चाहेगा। और जो अपराध करता और परमेश्वर का विरोध करता है वह विश्वासी के घर मदद माँगने आएगा।
20 गरीब आदमी को कोई भी पसन्द नहीं करता। और यहाँ तक ​​कि उसके करीबी रिश्तेदार भी यह नहीं छिपा सकते कि वे उसे पसंद नहीं करते। लेकिन अमीर व्यक्ति के कई दोस्त होते हैं।
21 जो व्यक्ति दूसरे लोगों के मदद माँगने पर उन से घृणा करता है, वह पाप करता है। लेकिन करुणा दिखाने वाले और जरूरतमंदों की मदद करने वाले को कैसा आनन्द और आशीर्वाद मिलता है!
22 जो दूसरों को नुकसान पहुँचाने की योजना बनाता है वह भटक गया है। लेकिन जो सही रास्ते पर चलता है वह सोचता है कि दूसरों की कैसे मदद की जाए। ऐसा व्यक्ति लोगों का प्यार और आदर पाएगा।
23 मेहनती व्यक्ति अपने हर काम में सफल होगा और बहुतायत में जीवित रहेगा। लेकिन जो सिर्फ़ बोलता है और कुछ नहीं करता वह गरीबी में जिएगा।
24 जो बुद्धिमानी से काम करता है उसे ईनाम में धन दिया जाएगा। लेकिन जो मूर्खता से काम करता है उसे मूर्खता के अलावा कुछ नहीं मिलेगा।
25 ईमानदार व्यक्ति अदालत में सच बोलेगा और दूसरे लोगों को झूठे आरोपों से बचाएगा। लेकिन बेईमान व्यक्ति बहुत झूठ बोलेगा और निर्दोष लोगों को नुकसान पहुँचाएगा।
26 जो प्रभु का भय मानता है वह हर परिस्थिति में उस पर पूरा भरोसा रखेगा। और ऐसे व्यक्ति के परिवार को खतरा होने पर परमेश्वर उसके बच्चों को सुरक्षित स्थान पर छिपा देगा।
27 जो प्रभु का भय मानता है वह ऐसी शक्ति से भर जाएगा, मानो वह जीवन के सोते में से पीता है। ऐसा व्यक्ति उन परिस्थितियों से बचेगा, जो उसे मौत की ओर ले जा सकती है।
28 किसी देश की जितनी अधिक जनसंख्या होती है, उस देश का राजा उतना ही अधिक शक्तिशाली हो जाता है। लेकिन अगर जनसंख्या कम हो जाती है तो राजा अपनी शक्ति खो देता है।
29 व्यक्ति जितना अधिक धीरज धरता है, उसके पास उतनी ही अधिक बुद्धि होती है। लेकिन जो जल्दी से गुस्सा हो जाता है वह मूर्खता से व्यवहार करता है।
30 अगर किसी का दिल शान्ति से भरा है तो उसका स्वास्थ्य अच्छा होगा। लेकिन दूसरों से जलन स्वास्थ्य को वैसे ही नष्ट कर देती है जैसे घातक बीमारी हड्डियों को नष्ट कर देती है।
31 जो गरीब व्यक्ति के साथ अन्याय करता है और उसके खर्चे पर अपने आप को धनी बनाता है, वह उसके बनाने वाले का अपमान करता है। लेकिन जो दया दिखाता है और गरीब लोगों की मदद करता है, वह परमेश्वर की महिमा करता है।
32 जब मुसीबत आएगी तब नीच व्यक्ति का जीवन नाश कर देगी। और वह अपने बुरे कामों के अनुसार वह प्राप्त करेगा जिसके योग्य वह है। लेकिन जो विश्वासी सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह परमेश्वर पर भरोसा करेगा तब भी जब उसका जीवन खतरे में होगा।
33 बुद्धिमान व्यक्ति का दिल बुद्धि से भरा रहता है। और वह जानता है कि मूर्ख व्यक्ति को बुद्धिमानी से जवाब कैसे देना है।
34 जिस देश के लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं और सही काम करने के लिए उत्सुक रहते हैं वे अपने देश को महान बनाएंगे। लेकिन जिस देश के लोग पाप में जीते हैं वे अपने देश को शर्मिंदा करेंगे।
35 राजा उस दास से खुश होगा, जो अपना काम योग्यता से करता है। लेकिन जो गलत तरीके से अपना काम करता है उस से राजा गुस्सा होगा।

अध्याय 15

1 जो व्यक्ति जानता है कि जब कोई उसका अपमान करता है तो उसे कोमलता से कैसे जवाब दें, ऐसा व्यक्ति क्रोध से भरे हुए दूसरे व्यक्ति को शान्त करने के योग्य होगा। लेकिन जो व्यक्ति जवाब में अपमानजनक शब्द बोलता है वह चिड़चिड़े व्यक्ति का क्रोध कई गुना बढ़ा देगा।
2 जब बुद्धिमान लोग बोलते हैं तब वे दूसरों के साथ उपयोगी ज्ञान को बाँटते हैं। लेकिन जब मूर्ख बोलते हैं तब उनके शब्दों में कोई समझ की बात नहीं होती।
3 प्रभु सब कुछ देखता है, जो पृथ्वी पर होता है। वह बुराई करने वालों और भलाई करने वालों पर नजर रखता है।
4 भले वचन व्यक्ति को ऐसी शक्ति से भर देते हैं, जैसे की उसने जीवन के पेड़ का फल खा लिया है। लेकिन बुरे शब्द दूसरे व्यक्ति के दिल को तोड़ देते हैं।
5 जो व्यक्ति अपने पिता के उचित सुधारों को अनदेखा करता है वह मूर्ख है। लेकिन जो व्यक्ति अपने पिता के उचित सुधारों पर ध्यान देता है वह समझदार है।
6 विश्वासी ईमानदारी से कमाता है और अपने घर के लिए बहुत सी महंगी चीजें खरीदता है। लेकिन नीच व्यक्ति गैरकानूनी तरीकों से बहुत अधिक लाभ प्राप्त करता है लेकिन यह उसके लिए सिर्फ़ समस्याएँ ही लाता है।
7 अगर किसी व्यक्ति का दिल बुद्धि से भरा है तो वह अपना ज्ञान दूसरों के साथ बाँटेगा। लेकिन अगर किसी व्यक्ति के दिल में मूर्खता रहती है तो उसके शब्दों में कोई समझ की बात नहीं होगी।
8 प्रभु को घृणा होती है जब नीच लोग अनुग्रह पाने के लिए उसके लिए बलिदान चढ़ाते हैं। लेकिन परमेश्वर प्यार करता है जब सही काम करने के लिए उत्सुक रहने वाले विश्वासी प्रार्थना में उसके पास आते हैं।
9 नीच व्यक्ति के जीवन के तरीके से प्रभु को घृणा होती है। लेकिन परमेश्वर उसी से प्यार करता है जिसने जीवन में सही दिशा चुनी।
10 जो व्यक्ति सही रास्ते से भटक जाता है उसे कठोर सजा मिलेगी। और जो व्यक्ति दूसरों के द्वारा सुधारे जाने से नफ़रत करता है, वह मर जाएगा।
11 प्रभु देखता है कि नरक में और उस जगह क्या हो रहा है जहाँ लोग मौत के बाद जाते हैं। और बिल्कुल, वह देखता है कि पृथ्वी पर रहने वाले लोगों के दिलों में क्या हो रहा है।
12 मूर्ख को दूसरों का मज़ाक उड़ाना अच्छा लगता है। लेकिन वह उन लोगों को पसन्द नहीं करता, जो उसका उचित सुधार करते हैं। इसलिए वह बुद्धिमान लोगों के साथ कभी संगति नहीं करेगा।
13 अगर किसी का दिल आनन्द से भरा है तो वह खुश दिखाई देगा। लेकिन अगर उसका दिल दर्द से भरा है तो उसका दिल टूट जाएगा और वह निराश दिखाई देगा।
14 बुद्धिमान व्यक्ति का दिल ज्ञान को ढूँढता है। लेकिन मूर्ख व्यक्ति का दिल मूर्खता से भरा है और जो कुछ वह कहता है उसका कोई मतलब नहीं।
15 अगर किसी व्यक्ति का दिल दर्द से भरा है तो वह हर दिन दु:खी और उदास रहेगा। लेकिन जिसका दिल आनन्द से भरा है वह अपने जीवन के हर दिन का आनंद लेगा।
16 गैरकानूनी तरीकों से बहुत सा धन कमाने और हर समय चिंता करने से कम आमदनी होना और परमेश्वर का भय मानना बेहतर है।
17 प्यार करने वालों के साथ सादा सब्जी खाना, एक दूसरे से नफ़रत करने वालों के साथ पके हुए बैल का मांस खाने से बेहतर है।
18 गर्म स्वभाव का व्यक्ति झगड़ा शुरू करता है लेकिन धीरज रखने वाला व्यक्ति झगड़ा शान्त करता है।
19 आलसी व्यक्ति काम करना पसंद नहीं करता। और उसका जीवन उस रास्ते की तरह है, जिस में कांटे वाले जंगली पौधे उग गए हैं। विश्वासी काम करना पसंद करता है। और उसका जीवन अच्छी तरह से बनी हुई सड़क की तरह है।
20 बुद्धिमान बेटा अपने पिता के साथ आदर से व्यवहार करता है और अपने पिता को आनन्द देता है। लेकिन बेवकूफ बेटा अपनी माँ से घृणा करता है और उसे उदास करता है।
21 बेवकूफ व्यक्ति मूर्खता के काम करना पसंद करता है इसलिए वह अपने जीवन में गलत रास्ते पर चला जाता है। लेकिन समझदार व्यक्ति वही करना पसंद करता है जो सही है इसलिए वह सही दिशा में जाता है।
22 जो व्यक्ति दूसरे लोगों के साथ अपनी योजनाओं की चर्चा नहीं करता, वह अपनी योजनाओं को पूरा नहीं कर पाएगा। लेकिन जो व्यक्ति कई समझदार लोगों की सलाह सुनता है वह अपनी योजनाओं को पूरा कर पाएगा।
23 किसी व्यक्ति को कितनी खुशी मिलती है जब वह दूसरे की मदद करने के लिए सही समय पर सही शब्द कहता है।
24 बुद्धिमान का जीवन उस मार्ग की तरह होता है, जो ऊपर जाता है। वह सही रास्ते से नहीं भटकेगा और खुद को उस सड़क पर नहीं पाएगा जो नरक की ओर जाती है।
25 प्रभु उन लोगों के घर को नष्ट कर देगा जो घमंडी हैं और विधवा के साथ अन्याय करते हैं। परमेश्वर विधवा और उसकी संपत्ति की रक्षा करेगा।
26 जब कोई नीच व्यक्ति बुराई करने के बारे में सोचता है तब प्रभु उसके विचारों से नफ़रत करता है। लेकिन जब विश्वासी अच्छा काम करने के बारे में सोचता है और इसके बारे में बात करता है तब परमेश्वर उससे प्यार करता है।
27 लालची व्यक्ति धनी होने के लिए रिश्वत लेता है, लेकिन वह अपने परिवार को नष्ट कर देगा। लेकिन रिश्वत से नफ़रत करने वाला मुसीबतों से बचेगा।
28 विश्वासी बोलने से पहले सोचता है और शांति से दूसरे व्यक्ति को जवाब देता है। लेकिन नीच व्यक्ति अपनी बातों के परिणामों के बारे में नहीं सोचता और वह गुस्से से लोगों पर चिल्लाता है।
29 नीच लोग अपना जीवन प्रभु से दूर रहकर जीते हैं। लेकिन विश्वासियों का परमेश्वर के साथ करीबी संबंध होता है। और जब वे प्रार्थना में प्रभु के पास आते हैं तब वह उनकी सुनता है।
30 सकारात्मक व्यक्ति दूसरे लोगों को प्रभावित करता है और उनके दिलों में खुशी लाता है। वह लोगों को उत्साहित करता है और उन्हें नई शक्ति मिलती है।
31 जो व्यक्ति अपना जीवन बदलना चाहता है वह बुद्धिमान लोगों के पास जाए और उनकी शिक्षा को ध्यान से सुने।
32 जो व्यक्ति उचित सुधारों पर ध्यान नहीं देता, वह अपने आप को नुकसान पहुँचाता है। लेकिन जो व्यक्ति सुधारों को सुनता है वह बुद्धिमान बन जाएगा।
33 जो व्यक्ति प्रभु का भय मानता है वह बुद्धिमानी से काम करना सीखेगा। और जो व्यक्ति घमंड के बिना दूसरे लोगों के साथ व्यवहार करता है वह लोगों का आदर कमाएगा।

अध्याय 16

1 व्यक्ति अपने दिल में योजनाएँ बनाता है। लेकिन प्रभु अपने लक्ष्यों को पूरा करना चाहता है इसलिए वह जानता है कि उसे अंत में क्या कहना है और क्या फैसला लेना है।
2 कोई व्यक्ति सोच सकता है कि जो कुछ भी वह करता है वह सही है। लेकिन प्रभु उसके सच्चे इरादों को जानता है। और सिर्फ़ परमेश्वर ही न्याय कर सकता है कि कोई व्यक्ति सही काम करता है या नहीं।
3 जो कुछ भी तुम करते हो उसे प्रभु को सौंप दो। तब तुम अपनी योजनाओं को पूरा कर पाओगे।
4 जो कुछ भी प्रभु करता है उसका अपना लक्ष्य होता है। प्रभु के पास उस व्यक्ति के लिए भी एक योजना है जो प्रभु को ठुकरा देता है। ऐसा व्यक्ति उस दिन नष्ट हो जाएगा जब बड़ा क्लेश उस पर आएगा।
5 परमेश्वर हर उस व्यक्ति से घृणा करता है जिसका मन घमण्ड से भरा है। ऐसा व्यक्ति सजा से बच नहीं पाएगा।
6 अगर कोई व्यक्ति दया करे और सच्चाई की शिक्षा के अनुसार काम करे तो परमेश्वर उसे उसके पाप से शुद्ध करेगा। जो प्रभु का भय मानता है वह कोई बुराई नहीं करेगा।
7 जब प्रभु तुम्हारे काम से खुश होगा तब परमेश्वर ऐसा करेगा कि तुम्हारे दुश्मन भी तुम्हारे साथ शान्ति से रहने लग जाएंगे।
8 गैरकानूनी तरीकों से बहुत अधिक लाभ प्राप्त करने की तुलना में कम आमदनी होना और ईमानदारी से जीना बेहतर है।
9 व्यक्ति अपने दिल में योजनाएँ बनाता है और सोचता है कि उसे क्या करना चाहिए। लेकिन यह प्रभु है जो व्यक्ति के जीवन का मार्गदर्शन करता है।
10 राजा के शब्दों में वह अधिकार होता है जो परमेश्वर ने उसे दिया है। इसलिए जब राजा दूसरों का न्याय करता है तब उसे सही फैसला लेना ही पड़ता है।
11 प्रभु चाहता है कि बेचने वाले सही तराजू और सही मापने वाले प्यालों का इस्तेमाल करें। परमेश्वर को अच्छा लगता है जब बेचने वाले के थैले में सभी वजन उनके असली वजन से मेल खाते हैं।
12 जब लोग कानून को तोड़ते हैं तब राजा को इस बात से नफ़रत करनी ही चाहिए। अगर राजा न्याय के साथ काम करता है तो यह उसके अधिकार को और भी अधिक मजबूत बनाएगा।
13 राजा सच जानना चाहता है। इसलिए वह उस व्यक्ति को पसन्द करता है जो उससे सच नहीं छिपाता।
14 अगर राजा गुस्सा होता है तो वह मौत की आज्ञा दे सकता है। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति राजा से बात करना जानता है ताकि वह उसके गुस्से को दया में बदल सके।
15 अगर राजा अच्छे मूड में होता है तो वह दूसरे व्यक्ति को माफ़ कर सकता है और उसका जीवन बख्श सकता है। जैसे फसल बसंत की बारिश पर निर्भर करती है वैसे ही व्यक्ति का जीवन राजा के अनुग्रह पर निर्भर करता है।
16 बुद्धिमान बनने का हर संभव प्रयास करो क्योंकि बुद्धि सोने से ज़्यादा बेहतर है। समझदार व्यक्ति बनने का हर संभव प्रयास करो क्योंकि समझ शुद्ध चाँदी से ज़्यादा कीमती है।
17 जो लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं वे ऐसा जीवन जीते हैं कि वे बुराई नहीं करते। जो सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह खुद को मुसीबतों से दूर रखेगा।
18 घमंड व्यक्ति को नष्ट कर देगा। अहंकार करने वाला व्यक्ति अपने गलत कामों से दु:ख उठाएगा।
19 ईमानदार होना और गरीब लोगों के बीच रहना अपराधियों के साथ दूसरे व्यक्ति को लूटने और इस बात पर घमंड करने से ज़्यादा बेहतर है कि तुम अपराधियों के साथ अमीर बन गए।
20 जो आज्ञाओं को ध्यान से सुनता है और बुद्धि से काम करता है वह सफल होगा। और जो प्रभु पर भरोसा रखता है वह आशीषित और सुखी जीवन जिएगा।
21 जिसका दिल बुद्धि से भरा है वह समझदार व्यक्ति के नाम से जाना जाएगा। बुद्धिमान व्यक्ति दूसरों का अनुग्रह जीतना जानता है। वह सोच-समझकर बोलता है और उसकी बातें भरोसेमंद लगती हैं।
22 बुद्धिमान व्यक्ति इतने आनन्द से ज्ञान प्राप्त करता है जैसे की वह जीवन देने वाले सोते से पी रहा है। लेकिन मूर्ख कुछ भी सीखना नहीं चाहता, इसलिए उस पर अपना समय बर्बाद न करें।
23 अगर किसी व्यक्ति का दिल बुद्धि से भरा है तो वह बुद्धि से बोलेगा और उसके शब्द भरोसेमंद लगेंगे।
24 दया की बातें शहद की तरह मीठी होती हैं। वे प्राण को आनन्द से भर देती हैं और चंगाई लाती है।
25 ऐसा खतरनाक रास्ता है जो इन्सान के नज़रिये से सही लगता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस रास्ते को चुनेगा तो यह उसे मौत की ओर ले जाएगा।
26 हर एक को काम करना चाहिए। जो काम नहीं करता, वह भूखा रहेगा।
27 नीच व्यक्ति बुराई करने की योजना बनाता है।
उसकी बातें आग की तरह खतरनाक हैं।
28 जो लड़ाई से प्यार करता है वह झगड़े की स्थिति पैदा करता है। और जो अफ़वाहें फैलाता है वह दोस्तों के बीच अच्छे रिश्ते को तोड़ देता है।
29 बुरे इरादों वाला व्यक्ति दूसरों को सही मार्ग से भटकाएगा। वह लोगों को गलत काम करने के लिए उकसाएगा।
30 उसकी आँखें बुरी हैं। वह अपनी बुरी योजनाओं के बारे में सोचता है और बुरी मुस्कराहट के साथ अपराध करता है।
31 सही काम करने के लिए उत्सुक रहने वाला विश्वासी लोगों से आदर पाएगा और वह पक्के बाल होने तक जीवित रहेगा।
32 बड़ा धीरज रखने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति से बेहतर है जो बहादुरी से लड़ने लगता है। और जो अपने आप को वश में रखना जानता है वह नगरों को जीतने वाले से अधिक शक्तिशाली है।
33 व्यक्ति पर्ची डालता है और अच्छी किस्मत की आशा करता है। लेकिन किसी व्यक्ति की किस्मत का फैसला प्रभु करता है पर्ची नहीं।

अध्याय 17

1 बहस और झगड़ा पसन्द करने वालों के साथ उत्सव की मेज पर बैठने से अच्छे लोगों के साथ रोटी का सूखा टुकड़ा बाँटना बेहतर है।
2 बुद्धिमान दास अपने स्वामी के दुष्ट बेटे को वश में करना जानता है। इसलिए इस दास को अपने स्वामी के सब बेटों के साथ विरासत का हिस्सा मिलेगा।
3 जैसे आग चाँदी और सोने को अशुद्धियों से शुद्ध करने के लिए परीक्षा करती है वैसे ही प्रभु लोगों को पाप से शुद्ध करने के लिये उनके दिल की परीक्षा करता है।
4 नीच व्यक्ति उनकी बातें ध्यान से सुनता है जो दूसरों को बुराई करने के लिए उकसाते हैं। और झूठा व्यक्ति चुगली करने वालों की बातें खुशी से सुनता है।
5 जो व्यक्ति गरीब लोगों का मज़ाक उड़ाता है वह परमेश्वर का अपमान करता है जिसने उन्हें जीवन दिया। जो दूसरे व्यक्ति की मुसीबत में आनन्दित होता है वह सजा से बच नहीं पाएगा।
6 अगर बच्चे अपने माता-पिता का आदर करते हैं तो वे अपने दादा-दादी का भी आदर करेंगे। और यह बुजुर्गों को बहुत आनंद देगा।
7 अगर कोई मूर्ख बुद्धिमान की तरह बोलने की कोशिश करता है तो लोग हैरान हो जाते हैं। लेकिन लोग और भी ज़्यादा हैरान हो जाते हैं अगर कोई आदरणीय व्यक्ति झूठी बातें फैलाता है।
8 जो रिश्वत देता है वह सोचता है कि वह जहाँ भी जाएगा, वहाँ उसे चमत्कारिक रूप से सफल होने में मदद मिलेगी।
9 जो प्यार और मित्रता बनाए रखना चाहता है वह लोगों की गलतियों को माफ़ कर देगा। लेकिन जो पिछली गलतियों की याद दिलाता है वह रिश्तों को नष्ट कर देगा और अपने दोस्तों को खो देगा।
10 बुद्धिमान व्यक्ति को एक बार डाँटो और वह खुद को सुधारेगा। मूर्ख को सौ बार मारो लेकिन वह नहीं मानेगा।
11 जो नफ़रत भड़काता है वह बुराई करने की योजना बनाता है। उसके खिलाफ़ बेरहम और गुस्से से भरा दूत भेजा जाएगा।
12 ऐसे भालू की माँ से मिलना कितना खतरनाक है जिसके बच्चे ले लिए गए हैं! लेकिन ऐसे मूर्ख के साथ व्यवहार करना और भी खतरनाक है जो बेवकूफी से काम करता है।
13 जो तुम्हारे साथ भला करते हैं उनका नुकसान न करें। नहीं तो, बुराई तुम्हारे घर से कभी नहीं निकलेगी।
14 जो झगड़ा शुरू करता है वह उस व्यक्ति की तरह है जो बांध में दरार डालता है। झगड़े से बचना इसके नतीजों से निपटने की तुलना में बेहतर है।
15 प्रभु दो बातों से नफ़रत करता है। वह घृणा करता है जब नीच व्यक्ति को सही ठहराया जाता है और निर्दोष व्यक्ति पर आरोप लगाया जाता है।
16 मूर्ख सोचता है कि अगर उसके पास बहुत पैसा होगा तो यह उसकी समस्याओं का समाधान कर देगा। लेकिन कोई भी पैसा उसकी मदद नहीं कर सकता जो बुद्धि को नहीं ढूँढता।
17 सच्चा दोस्त अच्छे समय के साथ-साथ बुरे समय में भी तुम्हारे साथ रहेगा। और मुसीबत के समय रिश्तेदार तुम्हारी मदद करेंगे।
18 कितना मूर्ख है वह जो ज़मानती बनता है और दूसरे के कर्ज को भरने का वादा करता है!
19 जो झगड़ा करना पसन्द करता है वह पाप से प्यार करता है। और जो डींग मारना पसन्द करता है वह मुसीबत में पड़ेगा।
20 जो बुराई करने की योजना बनाता है वह सफल नहीं होगा। और जो झूठ फैलाएगा, वह मुसीबत में पड़ेगा।
21 जिनके बच्चे मूर्खता करते हैं उनके माता-पिता पर धिक्कार है। मूर्ख बेटा अपने पिता को आनन्द नहीं देगा।
22 अगर किसी का दिल आनन्द से भर जाता है तो यह उसे दवा की तरह चंगा करता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति की आत्मा टूट जाती है और उदास होती है तो वह बीमार और थका हुआ महसूस करेगा।
23 भ्रष्ट न्यायी गलत फ़ैसला लेने के लिए चुपके से रिश्वत लेता है।
24 जब बुद्धिमान व्यक्ति किसी बात के विषय में सीखता है तब वह छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देता है। लेकिन मूर्ख विचलित रहता है और किसी भी बात पर ध्यान नहीं लगा सकता।
25 बेवकूफ बेटा अपने पिता के लिए हाय लाता है और अपनी माता को दुःख देता है।
26 यह अन्याय है जब निर्दोष व्यक्ति अपराधियों के अपराध की सजा काटता हैं। यह सही नहीं जब आदरणीय लोगों को सच बोलने के लिए अदालत में लाया जाता है।
27 बुद्धिमान व्यक्ति अधिक नहीं बोलता। वह अच्छा सोचता है और हर स्थिति में शान्त रहता है।
28 जब मूर्ख चुप रहता है तब वह बुद्धिमान दिखाई दे सकता है। जब तक वह अपना मुँह बन्द रखता है तब तक वह होशियार दिखाई देता है।

अध्याय 18

1 स्वार्थी व्यक्ति अपने हितों को दूसरों के हितों से ऊपर रखता है। वह उन लोगों से बहस करता है जो उसे अच्छी सलाह देते हैं।
2 मूर्ख सीखना पसन्द नहीं करता। उसके पास कोई ज्ञान नहीं, लेकिन वह अपनी बात पर जोर देना पसन्द करता है।
3 लोग नीच व्यक्ति से घृणा करेंगे। वह बुरा नाम कमाएगा और अपने आप को शर्मिंदा करेगा।
4 बुद्धिमान व्यक्ति के शब्दों में गहरा मतलब छिपा हुआ होता है। यह सबसे गहरे समुद्र जितना गहरा है। जब वह बोलता है तब उसके शब्द तेज धारा की तरह बहते हैं।
5 यह ठीक नहीं कि कोई न्यायी किसी अपराधी को निर्दोष ठहराए और किसी निर्दोष को दण्ड दे।
6 मूर्ख की बातें झगड़े की ओर ले जाती हैं जो लड़ाई में बदल जाती है।
7 मूर्ख के बोलने का तरीका उसके जीवन को नष्ट कर देता है। वह मुसीबत में पड़ जाएगा और अपनी ही बातों से फंदे में फंस जाएगा।
8 जो व्यक्ति बकबक करना पसन्द करता है उसका मन बदनामी से भरा होता है। और वह बकबक करने का उतना ही आनन्द लेता है जितना लोग स्वादिष्ट भोजन का आनन्द लेते हैं।
9 आलसी मज़दूर उस व्यक्ति से अलग नहीं जो जानबूझकर अपने मालिक को नुकसान पहुँचाता है।
10 प्रभु का नाम एक मजबूत मीनार की तरह विश्वासी की रक्षा करता है। जो मुसीबत के समय परमेश्वर की ओर देखता है वह सुरक्षित होगा।
11 लेकिन अमीर व्यक्ति अपने धन पर भरोसा रखता है। वह सोचता है कि जैसे ऊँची दीवारें मजबूत शहर की रक्षा करती हैं वैसे ही उसका धन उसे मुसीबत से बचाएगा।
12 घमंडी व्यक्ति मुसीबत में पड़ेगा। लेकिन जो दूसरों से घृणा नहीं करता, वह लोगों से आदर पाएगा।
13 किसी को जवाब देने से पहले उसकी सुनना। नहीं तो, तुम मूर्ख दिखाई दोगे और शर्मिंदगी की स्थिति में आ जाओगे।
14 अगर कोई व्यक्ति अन्दर से मजबूत है तो वह बीमारी से लड़ पाएगा। लेकिन ऐसे व्यक्ति की मदद कैसे करें जिसने हार मान ली और जिसका दिल ही टूट गया हो?
15 बुद्धिमान व्यक्ति पूरे दिल से ज्ञान की खोज में रहता है। वह बुद्धिमान हो जाएगा क्योंकि जब दूसरे उसे सिखाते हैं तब वह ध्यान से सुनता है।
16 दान देने वाले व्यक्ति को नए मौके मिलेंगे और वह अधिकारी लोगों से मिलेगा।
17 जो अदालत में पहिले बोलता है वह सही लगता है। लेकिन जब तक न्यायी दोनों पक्षों को नहीं सुनता, तब तक वह कोई फ़ैसला नहीं ले सकता।
18 अगर अधिकारी लोग एक-दूसरे से सहमत नहीं हो सकते तो उनके झगड़े को पर्चियाँ डालकर सुलझाया जा सकता है।
19 मज़बूत शहर को जीतना रूठे हुए व्यक्ति को मनाने से आसान है। जब लोग झगड़ते हैं तब वे अपने दिलों को ऐसे कसकर बन्द कर लेते हैं जैसे वे किसी मजबूत किले के दरवाजे को बन्द करते हैं।
20 शब्द बीजों की तरह होते हैं जो बाद में फल लाएंगे। व्यक्ति का दिल उसकी बातों से भर जाएगा। और उसके शब्द उसके पूरे जीवन को प्रभावित करेंगे।
21 शब्दों में शक्ति होती है। वे जीवन और मौत दोनों ला सकते हैं। और जिन चीजों के बारे में व्यक्ति बात करना पसन्द करता है वही उसके जीवन में होगा।
22 जिसने पत्नी को पाया, उसने अपनी खुशी पाई और प्रभु की ओर से आशीष पाई है।
23 जब कोई गरीब व्यक्ति किसी अमीर व्यक्ति से मदद माँगता है तब उसे मदद की बजाय कठोरता भरा इनकार भी मिल सकता है।
24 किसी व्यक्ति के कई अविश्वसनीय दोस्त हो सकते हैं। लेकिन सच्चा दोस्त भाई से ज़्यादा करीब हो जाता है।

अध्याय 19

1 कितना मूर्ख है वह व्यक्ति जो गैरकानूनी तरीकों से पैसा कमाने के लिए झूठ बोलता है। ईमानदार होकर गरीब होना बेहतर है।
2 अगर किसी व्यक्ति के पास ज्ञान नहीं तो वह बिना सोचे समझे काम करेगा। वह अपने जल्दबाज़ी के फैसलों के कारण मुसीबत में पड़ेगा।
3 कोई व्यक्ति मूर्खता से काम करता है और अपने ही जीवन को नष्ट कर लेता है। लेकिन अपने दिल में वह प्रभु पर गुस्सा होता है और अपनी असफलताओं के लिए उसे दोष देता है।
4 अगर कोई व्यक्ति अमीर हो जाता है तो उसके पास बहुत से दोस्त हो जाते हैं। लेकिन अगर वह गरीब हो जाता है तो उसके पास एक दोस्त भी नहीं बचता।
5 जो अदालत में झूठी गवाही देता है वह सज़ा से बच नहीं पाएगा। और जो झूठ बोलता है वह अपना जीवन नहीं बचा सकता।
6 बहुत से लोग अधिकारी की तरफ़दारी पाने के लिए उसे खुश करना चाहते हैं। और हर कोई किसी ऐसे व्यक्ति के साथ अच्छे संबंध बनाना चाहता है जो उसकी मदद कर सकता है।
7 गरीब व्यक्ति के सभी रिश्तेदार उसे पसन्द नहीं करते। इसके अलावा, उसके दोस्त उसके साथ कोई भी संबंध नहीं रखना चाहते। अगर वह उनसे सिर्फ़ बात करना चाहता है तो भी वे उसे अनदेखा कर देते हैं।
8 जो बुद्धि से काम करना चाहता है वह अपने लिए भलाई चाहता है। और जो समझ दिखाता है वह सफल जीवन जीएगा।
9 जो अदालत में झूठी गवाही देता है वह सज़ा से बच नहीं पाएगा। और जो झूठ बोलता है वह नाश हो जाएगा।
10 मूर्ख को ऐश ओ आराम में नहीं जीना चाहिए। इसके अलावा, दास को अपने स्वामी को आदेश नहीं देना चाहिए।
11 समझदार व्यक्ति गुस्सा नहीं होता लेकिन वह धीरज धरता है। लोग उसका आदर करते हैं क्योंकि वह उन्हें उनकी गलतियों के लिए माफ़ कर देता है और उनके खिलाफ़ कोई अपराध नहीं करता।
12 जब राजा गुस्सा होता है तब वह दहाड़ते हुए शेर की तरह होता है जो अपने पास आने वाले को फाड़ डालने के लिए तैयार रहता है। और जब राजा अच्छे मूड में होता है तब वह अपने पास आने वाले पर अपनी कृपा दिखाता है। और उसकी दया जीवन देने वाली ओस के तरह है जो सुबह घास पर गिरती है।
13 बेवकूफ बेटा अपने पिता के लिए बहुत मुसीबतें लाता है। बड़बड़ाने वाली पत्नी अपने पति को टपकते पानी की तरह परेशान करती है।
14 माता-पिता अपने बेटे के लिए घर और धन विरासत के रूप में छोड़ कर जा सकते हैं। लेकिन सिर्फ़ प्रभु ही बुद्धिमान पत्नी दे सकता है।
15 जो आलसी होना पसन्द करता है उसे सोना अच्छा लगता है। और जो काम करने से इंकार करता है वह भूखा रहेगा।
16 जो आज्ञाओं का पालन करता है वह अपने प्राण को बुराई से बचाता है। लेकिन जो अपने कामों के परिणामों के बारे में नहीं सोचता और लापरवाही से व्यवहार करता है वह नाश हो जाएगा।
17 जो गरीब लोगों की मदद करता है वह प्रभु को उधार देता है। परमेश्वर कर्ज में नहीं रहेगा और वह ऐसे व्यक्ति को उसके अच्छे कामों के लिए ईनाम देगा।
18 जो अपने बेटे को सुधारता है वह आशा करता है कि उसका बेटा जीवन में ठीक मार्ग चुनेगा। लेकिन जो अपने बेटे को नहीं सुधारता, वह अपने बेटे का जीवन नष्ट कर देगा।
19 गर्म स्वभाव के व्यक्ति को उसके कामों के परिणामों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। लेकिन अगर तुम उसे जवाबदेह होने से दूर करने में मदद करते हो तो तुम्हें हर समय उसकी समस्याओं का समाधान करना होगा।
20 अगर तुम सलाह को सुनोगे और उचित सुधारों पर ध्यान दोगे तो बाद में तुम बुद्धिमानी से काम करना सीखोगे।
21 व्यक्ति अपने दिल में बहुत सी चीज़ों की योजनाएँ बना सकता है। लेकिन सिर्फ़ वही योजनाएँ सफल होंगी जो प्रभु की ओर से हैं।
22 गैरकानूनी तरीकों से पैसा कमाने से गरीब होना अच्छा है। गरीब व्यक्ति दूसरों की मदद करने का आनन्द ले सकता है।
23 जो प्रभु का भय मानता है वह सुखी जीवन जिएगा। वह अपने जीवन के हर दिन के लिए परमेश्वर का आभारी रहेगा और बुराई उसके पास नहीं आएगी।
24 आलसी व्यक्ति चम्मच तो लेता है लेकिन वह उसे अपने मुँह तक नहीं उठाना चाहता।
25 अगर तुम किसी ऐसे व्यक्ति का उचित सुधार करोगे जो अनादर से व्यवहार करता है तो वह तुम्हें नहीं सुनेगा। इसलिए उसे अपने कामों के परिणामों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। तब साधारण लोग भी समझ से काम करना सीख जाएंगे। लेकिन अगर तुम किसी बुद्धिमान व्यक्ति का उचित सुधार करोगे तो वह समझ जाएगा कि उसे अपने व्यवहार को सुधारना चाहिए।
26 जो बेटा अपने पिता को बर्बाद कर देता है और अपनी माँ को घर से भगा देता है वह शर्मिंदगी भरा व्यवहार करता है और अपने आप को बदनाम करता है।
27 हे मेरे बेटे, अगर तुम उचित सुधारों पर ध्यान देना बन्द कर दोगे तो तुम बेवकूफी भरी गलतियाँ करने लगोगे।
28 जब गवाह झूठी गवाही देता है तब अदालत का मज़ाक बन जाता है। और जब कोई अपराधी बोलता है तब वह कुशलता से झूठ बोलता है।
29 अपराधी न्याय से नहीं बच सकता। और मूर्ख पिटाई से नहीं बच सकता।

अध्याय 20

1 जो शराब पीता है वह अपना तमाशा बनाता है और लोग उसका मज़ाक उड़ाएंगे। जो तीखी शराब पसन्द करता है वह दूसरों से लड़ेगा। जो लोग शराब के आदी हैं वे बेवकूफी भरे काम करेंगे।
2 जब राजा गुस्से से भर जाता है तब वह दहाड़ते हुए शेर की तरह होता है। जो राजा के गुस्से को भड़काता है वह अपना जीवन खो सकता है।
3 कोई भी मूर्ख झगड़ा शुरू कर सकता है। लेकिन जो झगड़ों को सुलझाना जानता है वह आदर के योग्य है।
4 आलसी व्यक्ति बीज बोने के लिए भूमि को नहीं जोतता। वह व्यर्थ ही उस खेत में फसल का इन्तज़ार करता है जहाँ उसने कुछ भी नहीं बोया।
5 व्यक्ति के विचारों में इतनी गहराई होती है कि उसकी तुलना गहरे समुद्र से की जा सकती है। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति अपने विचारों को इस तरह से कहना जानता है कि दूसरे लोग उसे समझ सकें।
6 व्यक्ति के आस-पास बहुत से लोग हो सकते हैं जो खुद को उसका दोस्त कहते हैं। लेकिन एक सच्चा दोस्त मिलना कितना मुश्किल है जो तुम्हें कभी असफल नहीं होने देगा!
7 अगर कोई विश्वासी सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है तो उसके बच्चे आशीषित और सुखी जीवन जीएंगे।
8 जब राजा अपराधी पर दंड की आज्ञा सुनाता है तब अपराधी के लिए राजा की ओर देखना कितना भयानक है!
9 कौन ऐसा कहने की हिम्मत कर सकता है, “मैंने अपने दिल को साफ़ किया और अपने पाप से छुटकारा पाया?”
10 प्रभु नफ़रत करता है जब बेचने वाले दूसरों को धोखा देने के लिए गलत तराजू और गलत मापने वाले प्यालों का इस्तेमाल करते हैं।
11 एक बच्चे के चाल-चलन को देखो। अगर उसके माता-पिता ने उसे सही तरीके से पाला है तो वह ईमानदारी से काम करेगा।
12 प्रभु ने लोगों को देखने और सुनने की क्षमता दी ताकि वे बुद्धि की बातें सीख सकें।
13 जो नींद से प्यार करता है वह गरीब हो जाएगा। लेकिन जो थके हुए भी काम करता है उसके पास जीवन भर के लिए जरूरत की हर चीज़ होती है।
14 शुरुआत में खरीददार कीमत कम करने के लिए सामान की गुणवत्ता के बारे में शिकायत करता है। लेकिन बाद में वह दूसरों के सामने फूलता है कि वह एक अच्छी कीमत पर अच्छा सामान खरीद पाया।
15 जब लोग योग्यता के साथ बोलते हैं तब उनकी बातें बहूमूल्य पत्थर से अधिक कीमती होती हैं। ऐसे शब्द सोने और अनमोल गहने से भी अधिक मूल्यवान हैं।
16 अगर तुमने दूसरे व्यक्ति का कर्ज चुकाने का वादा किया लेकिन तुम ऐसा नहीं कर पाए तो लेनदार तुम्हारी सारी संपत्ति ले लेंगे। तुम्हारे पास कपड़े भी नहीं बचेंगे।
17 जो गैरकानूनी तरीकों से पैसा कमाना पसन्द करता है वह उसी तरह इसका आनन्द लेता है जैसे लोग स्वादिष्ट भोजन का आनन्द लेते हैं। लेकिन बाद में उसे ऐसा लगेगा जैसे उसे उल्टी हो रही है क्योंकि उसने गंदगी खाई है।
18 अगर तुम समझदार लोगों से सलाह लोगे तो तुम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाओगे। बिना योजना के युद्ध में जल्दबाज़ी न करना, नहीं तो तुम हार जाओगे।
19 जो अफ़वाहें फैलाता है वह भेद को छिपाना नहीं जानता। जो बहुत अधिक बोलता है उसके साथ संगति न रखना।
20 अपने माता-पिता का अपमान करने वाले का जीवन उस दीपक की तरह होगा जो घोर अन्धकार में चमकना बन्द कर देगा।
21 जितनी जल्दी कोई व्यक्ति अपनी विरासत प्राप्त करता है भविष्य में उसे उतना ही कम लाभ और आशीष मिलेगी।
22 जिस व्यक्ति ने तुम्हारे साथ गलत किया उस से यह मत कहो, “जैसा तुमने मेरे साथ किया, वैसा ही मैं भी तुम्हारे साथ करूँगा।” इस स्थिति को प्रभु के हाथ में सौंप दो और वह बुराई से तुम्हारी रक्षा करेगा।
23 जब बेचने वाले खरीददारों को धोखा देते हैं और असली वजन से मेल न खाने वाले बट्टों का इस्तेमाल करते हैं तब प्रभु इससे नफ़रत करता है। गलत तराजू से तुम्हारा कोई भला नहीं होगा।
24 प्रभु व्यक्ति के जीवन की दिशा निर्धारित करता है। और कोई भी नहीं जानता कि भविष्य में उसके साथ क्या होगा।
25 कोई भी वादा करने से पहले अच्छी तरह से सोचना। नहीं तो, तुम अपने ही शब्दों से मुसीबत में पड़ सकते हो।
26 जैसे लोग भूसी को अनाज से अलग करने के लिए दावने वाला पहिया चलाते हैं वैसे ही बुद्धिमान राजा नीच लोगों को अपने मुँह के सामने से दूर करता है।
27 प्रभु व्यक्ति के मन में ज्योति जलाता है ताकि वह व्यक्ति देख सके कि उसके मन की गहराइयों में क्या हो रहा है।
28 अगर कोई राजा दया दिखाए और सच्चाई की शिक्षा के अनुसार काम करे तो ये बातें बुराई से उसकी रक्षा करेंगी। और अगर राजा अपने लोगों का ध्यान रखे तो वह अपने देश पर बहुत दिनों तक राज्य करेगा।
29 जवान लोग अपनी शक्ति के लिए जाने जाते हैं। लेकिन जो बूढ़े लोग पक्के बाल होने तक जीवित हैं वे अपने बुद्धि के लिए जाने जाते हैं।
30 जो व्यक्ति बुराई करता है उसके चेहरे पर चोट के निशान होंगे। ऐसा व्यक्ति अपनी दुष्ट योजनाओं को तब तक नहीं छोड़ेगा जब तक उसे पीटा न जाए।

अध्याय 21

1 अगर प्रभु चाहे तो वह तेज धारा वाली नदी की दिशा बदल सकता है। और उसी तरह से वह राजा के विचारों की दिशा बदल सकता है क्योंकि परमेश्वर राजा के दिल को अपने हाथ में रखता है।
2 कोई व्यक्ति सोच सकता है कि वह हमेशा वही करता है जो सही है। लेकिन प्रभु व्यक्ति के दिल के असली इरादों को जानता है। और सिर्फ़ परमेश्वर ही न्याय कर सकता है कि व्यक्ति सही करता है या नहीं।
3 जब कोई व्यक्ति सही फैसले लेता है और सही काम करता है तब प्रभु उस से प्यार करता है। लेकिन जो जीवन में गलत रास्ता चुनता है और उसकी तरफ़दारी पाने के लिए परमेश्वर को बलिदान चढ़ाता है वह प्रभु को खुश नहीं कर पाएगा।
4 जो पाप में जीता है और बुरे काम करता है वह दूसरों को घमण्ड की दृष्टि से देखता है क्योंकि उसका मन घमण्ड से भर हुआ है।
5 जो काम करना पसन्द करता है वह अपने काम को बढ़िया तरीके से करने का हर संभव प्रयास करता है। इसलिए वह सफलता में जीएगा। लेकिन जो लापरवाही से काम करता है और जल्दबाज़ी में अपना काम खत्म करता है वह गरीबी में जीएगा।
6 अगर कोई व्यक्ति अमीर होने के लिए झूठ बोलता है तो यह उसे मौत की ओर ले जाएगा। और उसकी दौलत पूरी तरह से गायब हो जाएगी।
7 जो न्याय करने से इन्कार करता है और दूसरों के साथ क्रूरता करता है उसके साथ भी क्रूरता की जाएगी।
8 जिसने अपराध किया वह दूसरों को धोखा देगा। लेकिन निर्दोष व्यक्ति ईमानदारी से व्यवहार करेगा।
9 बड़े घर में झगड़ालू पत्नी के साथ रहने से छत के किनारे पर रहना बेहतर है।
10 नीच व्यक्ति को बुराई करना अच्छा लगता है। इसलिए उसे अपने दोस्त पर भी दया नहीं आती।
11 अगर तुम किसी ऐसे व्यक्ति का उचित सुधार करोगे जो अनादर से व्यवहार करता है तो वह तुम्हें नहीं सुनेगा। इसलिए उसे अपने कामों के परिणामों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। तब साधारण व्यक्ति भी समझ से काम करना सीख जाएगा। और जो समझ के साथ काम करता है वह आनन्द से और भी समझदार बनना सीखेगा।
12 नीच व्यक्ति अपने घर के बन्द दरवाजों के पीछे जो करता है उसे परमेश्वर देखता है। प्रभु न्यायी है इसलिए नीच व्यक्ति विपत्ति से बच नहीं पाएगा।
13 जब गरीब व्यक्ति तुम से मदद माँगे तब उसे अनदेखा न करना। नहीं तो, जब तुम्हारे सामने मुश्किल परिस्थिति आएगी तब तुम्हारी भी कोई मदद नहीं करेगा।
14 अगर कोई व्यक्ति तुम पर गुस्सा है और क्रोध से भरा हुआ है तो उस से मेल मिलाप करने के लिए अपनी उदारता दिखाना। तुम को उससे अकेले में मिलने और उस के लिए कुछ उपहार ले जाने की ज़रूरत है।
15 जब लोग न्याय करते हैं तब विश्वासी आनन्दित होता है क्योंकि वह सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है। लेकिन कानून तोड़ने वाला न्याय से डरता है।
16 जो सही मार्ग से भटक जाता है वह नाश होकर कब्र में जाएगा।
17 जो मनोरंजन पसन्द करता है वह गरीब हो जाएगा। जो शराब और भोग विलास में पैसा खर्च करना पसन्द करता है वह अमीर नहीं होगा।
18 अगर कोई नीच व्यक्ति किसी विश्वासी को नुकसान पहुँचाना चाहता है तो विश्वासी के बजाय वह खुद दुःख उठाएगा। और अगर कोई झूठा व्यक्ति किसी ईमानदार व्यक्ति पर आरोप लगाना चाहता है तो ईमानदार व्यक्ति के बजाय वह खुद दुःख उठाएगा।
19 झगड़ालू और गुस्से वाली पत्नी के साथ रहने के बजाय रेगिस्तान में रहना बेहतर है।
20 बुद्धिमान व्यक्ति के घर में कीमती चीजें और खाने-पीने की वस्तुएं होती हैं। लेकिन मूर्ख बिना किसी लक्ष्य के वह सब कुछ खर्च कर देता है जो वह कमाता है।
21 जो ईमानदारी से काम करता है और दूसरों के साथ अच्छा करता है वह सुखी जीवन जीएगा। लोग ऐसे व्यक्ति के साथ अच्छी तरह से व्यवहार करेंगे और उसका आदर करेंगे।
22 बुद्धिमान व्यक्ति उस शहर को जीत पाएगा जिसकी रक्षा हथियारबंद लोग करते हैं। ऐसा लगता है कि शहर के चारों ओर की दीवारों को तोड़ना नामुमकिन है। लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि यह कैसे करना है।
23 जो व्यक्ति कुछ भी कहने से पहिले सोचता है और बहुत ज़्यादा नहीं बोलता, वह अपने आप को मुसीबतों से बचाएगा।
24 जो घमण्ड दिखाता और दूसरों को नीचा दिखाता है वह बिना किसी शर्म के बुराई करेगा।
25 आलसी आदमी काम नहीं करना चाहता इसलिए उसके सपने कभी भी पूरे नहीं होंगे। वह काम पर जाने के बजाय भूखा मरना पसन्द करेगा।
26 लालची व्यक्ति के पास हमेशा काफ़ी नहीं होता है इसलिए वह कभी भी जरूरतमंद लोगों की मदद नहीं करता। लेकिन एक विश्वासी जो कुछ उसके पास है उसे उदारता से दूसरों के साथ बाँटता है।
27 जब नीच लोग परमेश्वर का अनुग्रह पाने के लिए उसे बलिदान चढ़ाते हैं तब परमेश्वर उस से नफ़रत करता है। और प्रभु विशेष रूप से इससे नफ़रत करता है जब वे अपराध करने से पहले ऐसा करते हैं।
28 बेईमान व्यक्ति जो अदालत में झूठी गवाही देता है वह सजा से बच नहीं पाएगा। लेकिन ईमानदार व्यक्ति जो हमेशा सच बोलता है वह अदालत में वही बताएगा जो वह जानता है।
29 नीच व्यक्ति बेशर्मी से व्यवहार करता है और अपने कामों के परिणाम के बारे में नहीं सोचता। लेकिन विश्वासी सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है इसलिए वह कुछ भी करने से पहले सोचता है।
30 ऐसा कोई बुद्धिमान और चतुर व्यक्ति नहीं जो प्रभु को उसकी योजनाओं को पूरा करने से रोक सके।
31 जब कोई व्यक्ति अपने घोड़े को युद्ध के दिन के लिए तैयार करता है तब वह जीतने के लिए हर संभव प्रयास करता है। लेकिन जीत प्रभु की ओर से आती है।

अध्याय 22

1 बड़े धन से ज़्यादा अच्छा नाम होना बेहतर है। अच्छी इज्जत चाँदी और सोने से ज़्यादा कीमती होती है।
2 अमीर व्यक्ति और गरीब व्यक्ति में क्या समानता है? प्रभु ने ही उन दोनों को बनाया और उन्हें जीवन दिया।
3 समझदार व्यक्ति खतरे को देख लेता है और सावधानी से रहता है। लेकिन लापरवाह व्यक्ति खतरे को नजरअंदाज करता और मुसीबत में पड़ जाता है।
4 जो अपने आपको प्रभु के सामने नम्र करता है और उसका भय मानता है वह धन पाएगा। वह आदरणीय व्यक्ति बनेगा और सुखी जीवन जिएगा।
5 जो बुराई करने की योजना बनाता है वह अपने ही कामों से दु:ख उठाएगा। वह मुसीबत में पड़ेगा जो उसे कांटों की तरह चोट पहुँचाएगी। उसे ऐसी परेशानियाँ होंगी जो उसे जाल की तरह पकड़ लेंगी। लेकिन जो सही काम करने के लिए उत्सुक रहता है वह अपने आप को मुसीबतों से बचाएगा।
6 अगर तुम अपने बच्चे को बचपन से ही सही तरीके से बड़ा करोगे तो वह अपने जीवन के अन्त तक सही रास्ते से नहीं मुडे़गा।
7 गरीबों के ऊपर अमीरों का अधिकार होता है। और जो कर्ज लेता है वह दास की तरह अपने लेनदार की आज्ञा का पालन करेगा।
8 जो गुस्से के साथ अन्याय के बीज बोता है वह मुसीबत की कटनी काटेगा और अपना अधिकार खो देगा।
9 जो गरीबों पर दया दिखाता है और जिन्हें भोजन की ज़रूरत है उन्हें खिलाता है वह आशीष पाएगा।
10 जब तुम ऐसे व्यक्ति की संगति करना छोड़ दोगे जो दूसरों को नाराज करता है तब तुम बहस करना, झगड़ा करना और अपमान करना छोड़ दोगे।
11 अगर किसी का दिल सच्चा हो और वह बात करने में अच्छा हो तो राजा उसको अपने करीब ले आएगा।
12 प्रभु अपने वचन के पूरा होने पर नज़र रखता है। वह उन लोगों की योजनाओं को नष्ट कर देगा जो उस पर विश्वास नहीं करते और उसकी सच्चाई के खिलाफ़ बोलते हैं।
13 आलसी व्यक्ति हमेशा बहाने बनाता है। वह कहता है, “शहर में एक शेर घूम रहा है इसलिए मैं काम पर नहीं जा सकता। अगर मैं बाहर जाऊँगा तो वह मुझे चौक के बीच में टुकड़े-टुकड़े कर डालेगा!”
14 जो चरित्रहीन औरत से बात करता है वह खड़ी चट्टान के किनारे पर खड़ा होता है और प्रभु का क्रोध अपने ऊपर लाता है। जो उस औरत के साथ रिश्ता बनाएगा वह इस चट्टान से गिर जाएगा।
15 अगर कोई बच्चा सुधारों को नहीं समझता और गलत तरीके से व्यवहार करता रहता है तो शारीरिक अनुशासन उसे सही काम करना सिखाएगा।
16 जो धनी होने के लिए गरीबों के साथ अन्याय करता है वह अपनी दौलत खो देगा। और जो अमीरों का तरफ़दारी पाने के लिए उन पर अपनी उदारता दिखाता है वह गरीब हो जाएगा।
17 जो बुद्धि से बोलते हैं उनकी बातों को ध्यान से सुनना। और जो मैं तुम्हें सिखाता हूँ उसे याद रखना। इन्हें अपने दिल में हमेशा के लिए रहने देना।
18 मेरी बातों को मत भूलना। तब तुम बुद्धि से बात करोगे और यह तुम्हें आनन्द देगा।
19 जो मैं तुम्हें सिखाता हूँ उसे याद रखना। हर दिन तुम्हें प्रभु पर भरोसा रखना चाहिए।
20 मैं तुम्हें पहले ही तीस सलाहें लिख चुका हूँ कि सही तरीके से काम कैसे करना है।
21 मैंने तुम्हें सच्चाई की शिक्षा के अनुसार सिखाया। और मैं चाहता हूँ कि जो लोग तुम्हारे पास सलाह के लिए आते हैं उनसे तुम सच्चाई के वचन कहना।
22 गरीब लोग अपनी रक्षा नहीं कर पाते इसलिए उन्हें अमीर बनाने के लिए बर्बाद न कर देना। और गरीब होने के बावजूद भी उनके साथ अदालत में न्याय करना।
23 याद रखना कि प्रभु उनकी रक्षा करेगा और वह गरीब लोगों को लूटने वालों का जीवन उनसे छीन लेगा।
24 गुस्सा करने वाले से दोस्ती न करना। गर्म स्वभाव वाले व्यक्ति के साथ संगति न रखना।
25 नहीं तो, तुम भी उसी की तरह गर्म स्वभाव वाले व्यक्ति बन जाओगे और यह आदत तुम्हारे जीवन को नष्ट कर देगी।
26 किसी दूसरे व्यक्ति के कर्ज को चुकाने के लिए सहमत न होना और उसके धन की जिम्मेदारी अपने ऊपर न लेना।
27 अगर तुम उसका कर्ज चुकाने का वचन देते हो लेकिन तुम ऐसा न कर पाए तो लेनदार तुम्हारी सारी संपत्ति ले लेंगे। तुम्हारे पास बिस्तर भी नहीं बचेगा।
28 ऐसी सीमा को न बढ़ाना जो तुम्हारे बाप दादों ने बहुत पहले तय की थी।
29 क्या तुम किसी कुशल व्यक्ति को जानते हो? वह राजाओं की सेवा करेगा और वह साधारण लोगों के लिए काम नहीं करेगा।

Chapter 23

1 If an influential person invites you to dinner to discuss something with you, then be careful and do not eat everything you see.
2 Control yourself, even if you love eating.
3 Pay no attention to the delicious food that he would put in front of you. On the contrary, listen carefully to him so that he would not be able to deceive you and involve you in a dangerous business that promises to bring a quick profit.
4 Do not run after wealth. Be wise and refuse to participate in a risky business.
5 Otherwise, your wealth will disappear in the blink of an eye. Like an eagle, it will flap its wings and fly into the sky.
6 If a greedy person invites you to dinner, refuse to visit him. And no matter what kind of delicious food he would offer you.
7 The thoughts that fill the soul of a person show who he really is. So if you come to visit a greedy person, he will tell you, “Eat and drink.” But in his heart he will count the cost of every piece you will eat.
8 When you feel his attitude, you will feel sick from what you ate. And you will regret that you thanked him for his delicious food.
9 Do not give wise advices to a fool because he will treat them with contempt.
10 Do not move the boundary of a land that was established long ago. And do not seize the land that belongs to orphans.
11 The one who offends orphans will deal with the Almighty God who will defend them.
12 Pay attention when others make you proper corrections. And do not be distracted when people teach you wise things.
13 Correct your child and do not let him do whatever he wants. If you use physical discipline, it will not harm him.
14 On the contrary, it will do him good. You discipline him to save his soul from hell.
15 My son, if your heart is filled with wisdom, I will rejoice with all of my heart.
16 And I will be very happy for you when you say what is right.
17 Your heart should not envy the success of those who live in sin. All the days of your life you must fear the Lord with all of your heart.
18 There is a bright future waiting for you. So in every situation do not lose your hope in the Lord.
19 My son, listen to me and begin to act wisely. With all of your heart, do your best to choose right direction in life.
20 Do not spend your time in the company of those who drink alcohol and eat too much meat.
21 Such people are interested in nothing but alcohol and food. They sleep too much, so they will become poor and their clothes will turn into rags.
22 Listen to your father because he gave you life. And do not neglect your mother when she is old.
23 If you understood what the truth is, do not betray it for any money. Pay attention when someone makes you proper corrections. No matter what the cost is behave in a wise and reasonable way in every situation.
24 How pleasant and joyful it is for a father to have a wise son who believes in God and is eager to do what is right!
25 So behave wisely and you will bring joy to your father. And your mother will be happy that she gave birth to such a wonderful son.
26 My son, I want to know what is going on in your heart. Pay attention to how I live and take an example from me.
27 Do not enter into the relationship with an immoral woman because it is as dangerous as falling from a steep cliff. Do not sleep with a wife of another man. Otherwise, you will get into such big problems that it will be as difficult for you to get out from them as from a narrow well.
28 An immoral woman behaves like a robber who ruins other families. She looks for those who can be seduced. And many men enter into the relationship with her and become unfaithful to their wives.
29 Who weeps in sorrow and who is depressed? Who starts quarrels and who complains about life? Who gets hurt in foolish fights? And who has bloodshot eyes?
30 This is the way how the one who loves drinking wine looks like. This is the way how the one who is always ready to try new alcoholic drinks lives like.
31 Do not look at how the wine sparks beautifully when it is poured out into glasses.
32 But if you start drinking, later on you will feel as bad as if a snake bit you or a viper stung you.
33 You will see strange things. You will not be able to think clearly and you will talk about immoral things.
34 When you fall asleep, you will feel as if you climbed the mast of a ship in a stormy sea.
35 And when you wake up, you will say, “People beat me, but I did not feel any pain. They pushed me, but I felt nothing. Now I need to get drunk again.”

Chapter 24

1 Do not envy the success of those who do evil. Avoid fellowship with such people.
2 They plan to commit violent crimes and talk about how to make troubles to others.
3 The one who wants to build a house needs wisdom. The one who wants to improve his house must have professional skills.
4 And when the house is built then people who understand design buy all kinds of valuable and beautiful things to make their house cozy.
5 The one who becomes wise becomes strong. And the one who continues to get knowledge will become even stronger.
6 So before the beginning of the battle, you must go to knowledgeable people and plan your actions carefully. You will be able to win if you listen to the advices of experienced people constantly.
7 Wisdom is too deep for a fool. So when wise people discuss important things, a fool does not understand what the conversation is about and he keeps silent.
8 The one who makes plans to harm others will earn reputation of a wicked person.
9 The one who plans to commit a foolish action has planned to commit a sin. And people will hate the one who treats others with contempt.
10 The way a person behaves in the time of troubles shows how strong he is. If you give up quickly and lose your heart in the time of distress then you will not have enough strength to overcome.
11 Rescue those who are close to their death, and help those who are doomed to die.
12 Do not ignore their cries for help and do not say, “It is none of my business!” The Lord can see what is happening in your heart. He watches the way you act. You should remember that everyone will receive from God what he deserves according to his deeds.
13 My son, you love eating honeycomb because it is delicious and good for health.
14 Learn to act wisely. And it will be as pleasant to your soul as if you eat honeycomb. If you become wise, you will have a great future and your dreams will come true.
15 Do not act like a wicked person who watches over a house where a believer lives peacefully. Do not make any plan to break into his house and rob it.
16 A believer can face troubles seven times, but he will always be able to solve all his problems. But a wicked person who harms a believer will be destroyed by disaster.
17 But do not rejoice when something bad happens to your enemy. And do not be glad in your heart when disaster happens to your adversary.
18 If you rejoice at another person’s troubles, the Lord will see it. He will not be pleased with what is happening in your heart, and He will stop pouring out His wrath on your enemy.
19 Do not get angry if someone harmed you. And do not envy the success of evil people.
20 There will be nothing good in the future of the one who does evil. The life of a wicked person will come to its end as a lamp that is dying out.
21 My son, fear the Lord and the king. Have nothing to do with those who go against God and raise a rebellion to overthrow the government.
22 Otherwise, disaster will suddenly happen to the one who does not fear the Lord and the king. No one knows how the Lord will punish the rebels, and how the king will deal with the rioters.
23 Here is one more wise saying. It is not right if a judge shows favoritism to some person and makes unfair decisions.
24 The one who says to a criminal that he is right will be cursed by people and hated by nations.
25 But if a judge gives a just sentence to the guilty then a judge will earn good reputation and receive a blessing from God.
26 A true friend loves so sincerely that when he tells the truth, it is as pleasant as a friendly kiss.
27 First, complete all your business outside your home and finish your work on the fields. If you can see that you are able to earn your living then you can start building or improving your house.
28 Do not give false testimony in the court against an innocent person. Don’t you understand that lying will not do you any good?
29 If someone harmed you, do not try to take revenge on him. Do not say, “I will do to this person what he did to me.”
30 I walked by the field of a lazy person. I passed by the vineyard that belonged to a fool.
31 I noticed that the field and the vineyard were covered with thorns and weeds, and the stone fence was broken.
32 Then I began to meditate on what I have seen. And here is what kind of conclusion I made.
33 You can stay in bed and think, “It is okay if I sleep a little bit and take a nap. It is okay if I do nothing and rest a little bit.”
34 But if you are lazy then poverty will attack you like a robber. And all kinds of problems will come to you like an armed bandit.

Chapter 25

1 Here are some more wise sayings of king Solomon that the servants of Hezekiah, the king of Judah, collected and wrote down.
2 Everything God does is covered with mystery, and it is beyond human understanding. So people admire the works of God. And people also admire kings who seek to understand God’s mysteries.
3 No one can measure the height of the sky and the depth of the earth. The same way no one can understand what is going on in the heart of a king.
4 Remove the impurity from silver then a master will be able to make an expensive vessel.
5 Drive out a wicked from the presence of a king. Then a king will be able to pass just laws that will make his authority strong.
6 Do not be arrogant in the presence of a king. And also do not take the place that is prepared for a respected person.
7 Otherwise, you will be very much ashamed when in front of him people will ask you to take another seat. But if you take a usual seat, and people will invite you to move to an honorable place, then you will be very pleased.
8 Do not rush to go to court. Otherwise, what will you do if you are proved to be wrong and lose to your opponent shamefully at the end?
9 If you take your case to court then speak only what is relevant to your case and do not open the secrets of another person.
10 Otherwise, the one who entrusted you with his secrets will hear your words and express his displeasure to you. You will not be able to restore your reputation, and people will stop trusting you.
11 A skillful jeweler knows how to make golden apples and decorate them with silver ornaments. And a skillful speaker knows how to say the right words at the right time.
12 Listen carefully to the proper corrections of a wise person. His advices are more precious than gold earrings and pure gold jewelry.
13 How pleasant it is to drink cold water at harvest time. And it is also pleasant to deal with someone who does exactly what he is asked to do. The one who hires such a person will always be satisfied.
14 No one likes it when on a hot day the wind carries clouds across the sky, but the clouds do not bring any rain. And the same way no one likes it when a person promises to show his generosity, but he does not keep his word.
15 If you want an influential person to be on your side then explain to him your point of view with patience. A person who is nice to talk with will achieve his goal because soft tongue breaks hard bone.
16 If you find honey, do not eat too much. Otherwise, you will overeat and throw up.
17 Do not visit your friend’s home too often. Otherwise, he will get tired of you, and you will feel that he dislikes you.
18 The one who gives false testimony in the court puts the life of an innocent person in mortal danger. False accusations hit like a club. They pierce like a sword and hurt like a sharp arrow.
19 If you rely on an irresponsible person in the times of trouble, it will hurt you as much as chewing with a broken tooth or stepping on a lame foot.
20 If a person is in trouble, do not sing joyful songs to him. It is as inappropriate as taking off your clothes on a cold day. It hurts as much as pouring vinegar on a wound.
21 If your enemy is hungry, give him bread. If he is thirsty, give him water.
22 This way you will make your adversary burn with shame as if burning coals were poured on his head. And the Lord will reward you for doing good to your enemy.
23 If the north wind starts blowing, it will bring clouds, and it will rain. And if someone starts spreading gossips, he will bring hostility, and people will look at each other with anger.
24 It is better to live on the edge of a roof than in a spacious house with a quarrelsome wife.
25 Good news from the loved ones who live in another country is as pleasant as cold water for a very thirsty person.
26 If a believer turns away from the truth and acts like a wicked person, he becomes like a muddy spring or a polluted well.
27 The one who eats too much honey will feel vomiting. And people will disgust the one who praises himself all the time.
28 The one who does not know how to control himself is like a ruined city with broken-down walls.

Chapter 26

1 It is disappointing when snow falls in the summer, and it rains during the harvest. It is also disappointing when people honor a fool.
2 If you did not deserve a curse, then it will not come upon you. An undeserved curse will spread its wings like a bird, and it will fly away.
3 People direct a horse with a whip, and they stop a donkey with a bridle. But people beat the back of a fool with a stick.
4 Do not act stupidly in a response to stupid actions of another person, and you will not become a fool.
5 But give a stupid answer to a stupid question, and then the fool will not become wise in his eyes.
6 He who trusts a fool to deliver a message cuts off his legs and gets into trouble.
7 When a fool speaks in a proverb, he resembles a lame person who moves his legs with difficulty.
8 He who honors a fool is like a person who shoots a sling with precious stones.
9 If a fool speaks in a proverb, he reminds of a drunkard who takes a thorny branch in his hand.
10 He who has an authority acts according to his own will. He rewards a fool, he rewards a random person.
11 As a dog returns to its vomit, so a fool repeats his foolishness.
12 Did you see a person wise in his eyes? He is worse than a fool, you cannot rely on him.
13 A lazy person says, “A lion walks on the road, a lion goes on the streets!”
14 As a door turns on its hinges, so a lazy person turns on his bed.
15 A lazy person puts his hand down into the bowl, but it is difficult for him to lift it to his mouth.
16 A lazy person looks smarter in his eyes than seven people who answer wisely.
17 He who passes by and interferes in people’s quarrel is like a person who grabs a dog by the ears.
18 He who pretends to be crazy becomes a dangerous person. He plays with fire, arrows and death.
19 A person who deceives his friend, but then he says, “I was only joking,” is also dangerous.
20 Fire goes out without wood, and quarrels disappear without a gossiper.
21 Charcoal quickly gives heat, and wood quickly starts fire. The same way a quarrelsome person quickly starts a fight.
22 The words of a gossiper are tasty like sweets, they go deep inside of a person.
23 He who speaks great words, but has an evil heart, is like a clay pot which is covered with impure silver.
24 An enemy covers his hatred with deceitful words, but he plans to do evil in his heart.
25 If your enemy speaks with a kind voice, do not believe him, because seven disgusting things fills his heart.
26 An enemy deceives and hides his hatred, but among the assembly of people he will show his evilness.
27 He who digs a pit for another person will fall into it. Do not roll a stone on another person, otherwise this stone will roll back on you.
28 A deceitful person hates others, and he crushes them with his words. Deceitful words lead to ruin.

Chapter 27

1 Do not boast about tomorrow, because you do not know what the day will bring.
2 Do not praise yourself, let another person do it. Don’t speak the words of praise about yourself, let other people do it.
3 It is heavy to carry stones, it is heavy to carry sand, but the anger of a fool is heavier than stones and sand.
4 Anger wakes up cruelty, and fury comes like a flood. But who can stand against jealousy?
5 It is better to rebuke openly than to pretend that you love and keep silence.
6 A friend loves sincerely, and he rebukes sincerely. But an enemy hates, and he kisses falsely.
7 A person who has a full stomach hates honeycombs. But everything becomes sweet for a hungry soul.
8 A person who leaves his place is like a bird which leaves its nest.
9 A good advice of a friend brings joy to the heart like fragrant oil and perfume.
10 When a disaster happens, do not go to your brother’s house. It is better to go to your friend or to your father’s friend. A close neighbor will help more than a brother who lives far away.
11 My son, become wise, make my heart glad. And then I will know what to answer to the person who speaks evil about me.
12 A clever person foresees danger and hides from it. But an unexperienced person goes ahead, and he gets in trouble.
13 If you promise and guarantee to pay off the debts of another person then you will lose even your clothes.
14 If early in the morning you loudly bless your friend, it will sound to him like a curse.
15 A quarrelsome wife annoys like the constant dripping on a rainy day.
16 He who wants to stop a quarrelsome wife wants to stop the wind. You will not hold her, she will slip away like from oily hands.
17 As iron sharpens iron, so friends correct each other.
18 He who takes care of a fig tree will eat its fruit. He who protects his master will get respect.
19 Look in the water, and you will see the face. Look in the heart, and you will see who the person really is.
20 Hell and death are never satisfied, the same way the eyes of a person are not satisfied.
21 People value purified silver and refined gold. The same way people value a person who has good recommendations.
22 Beat a stupid person along with grain in a vessel, but even a crushing stick will not separate his foolishness from him.
23 Pay attention to your cattle and take care of your flocks.
24 You cannot keep reaches forever. And does authority pass from generation to generation?
25 When people remove dry grass, then tender grass grows again, and people gather mountain herbs.
26 Make your clothes from sheep’s wool, and pay off the price of a field with your goats.
27 And the goats will give enough milk for you, for your family and for your female servants.

Chapter 28

1 A wicked person runs away though no one chases him. But a righteous person walks boldly like a lion.
2 When a country rebels against the law, then it has many rulers. But when a wise and a knowledgeable person governs, then stability comes to the country.
3 Heavy rain destroys the crop. A poor man does the same if he oppresses needy people.
4 He who breaks the Law of God the Creator praises wicked people. He who obeys the Law of God resists wicked people.
5 Evil people do not understand justice. But he who seeks the Lord understands everything.
6 It is better to be poor and to live blamelessly than to be rich and to pervert his ways.
7 An understanding son obeys the Law of God the Creator. But he who joins a bad company brings shame to his father.
8 He who lends money at high interest will give his profit to the one who does charity.
9 It is disgusting to God if a person prays, but he does not listen to the Law of God the Creator.
10 He who leads righteous people to an evil path will fall into his own pit. But blameless people will inherit good things.
11 A rich man thinks that he is wise, but a smart poor man can see who the rich man really is.
12 When righteous people triumph, then great glory comes. But when wicked people rise, then people hide themselves.
13 He who hides his sins will not prosper. But a person who confesses his sins and turns away from them will receive mercy.
14 A blessed person always trembles before God. But he who makes his heart hard will fall into trouble.
15 A wicked ruler over a poor nation is dangerous like a roaring lion and a hungry bear.
16 A foolish ruler oppresses his people greatly. But if a ruler hates corruption, then he will govern for a long time.
17 A person who shed blood is guilty of murder. He will live in fear until his death that people will catch him.
18 He who walks blamelessly will live safely. But he who crooks his ways will fall in one of them.
19 He who works on his land will have a lot of bread, but a lazy person will become poor.
20 An honest person becomes rich with blessings. But he who who wants to get rich quickly will get punishment.
21 It is not good to show favoritism. A partial person will do wrong things even for a piece of bread.
22 A greedy person wants to get rich quickly. But he does not know that he will become poor.
23 Make proper corrections to others, and later people will appreciate you more than the one who speaks lie.
24 A person who joined a company of wicked people will rob his father and his mother. He will say, “This is not a sin.”
25 A greedy person starts a quarrel. But he who trusts in the Lord will prosper.
26 It is foolish to trust in yourself. Walk in wisdom, and you will live safely.
27 He who gives to a poor person will not live in need. But he who ignores a poor person will receive many curses.
28 When wicked people rise, then people hide. But when wicked people perish, then righteous people multiply.

Chapter 29

1 When people rebuke a person, but he continues to be stubborn, then disease will suddenly destroy him, and he will not get healing.
2 When righteous people come to authority, then people rejoice. But when a wicked person rules, then people groan.
3 He who loves wisdom brings joy to his father. But he who goes to immoral women wastes his wealth.
4 A just king brings stability to his nation. But he who loves taking bribes destroys his country.
5 He who speaks false compliments to his friend spreads a net to his feet.
6 An evil man sins and spreads a net for himself, but a righteous person sings and rejoices.
7 A righteous person cares about the case of the poor, but a wicked person does not care at all.
8 Rebellious people provoke a riot in the city, but wise people calm down angry people.
9 If a wise person goes to court with a fool, then sometimes he will be angry, and sometimes he will laugh, but he will not have peace.
10 Bloodthirsty people hate a blameless person and seek to kill him.
11 A fool pours out all his anger, but a wise person holds his anger back.
12 If a ruler listens to lies, then all his officials are wicked people.
13 What do a poor person and his oppressor have in common? The Lord gives light to the eyes of both.
14 If a king judges poor people justly, then his authority will last forever.
15 A stick and a rebuke bring wisdom. But if people do not discipline a child, he will bring shame to his mother.
16 When wicked people multiply, sin also multiplies. But righteous people will see their fall.
17 Discipline your son, and he will bring you peace, and he will make your soul glad.
18 If people have no revelation from above, they rebel. But people who keep the Law of God the Creator receive blessing.
19 Words will not correct a servant, he understands the words, but he ignores them.
20 Did you know a person who speaks without thinking? He is worse than a fool, you cannot rely on him.
21 If you give your servant everything he wants from his childhood, then in the future he will want to take a place of your son.
22 An angry person starts a fight, and a hot-tempered person sins a lot.
23 Pride humiliates a person. People respect the one who humbles himself in the spirit.
24 He who helps a thief hates himself. He will stand in court, and he will protect the thief.
25 Fear of people spreads a net. But he who trusts in the Lord will live safely.
26 Many people seek approval of a ruler, but justice comes only from the Lord.
27 He who acts unjustly is disgusting to just people. But a righteous person who walks straight is disgusting to a wicked person.

Chapter 30

1 Jakeh had a son Agur. Agur spoke inspired words to Ithiel and Ucal.
2 Surely I am more stupid than other people. I do not understand what others understand.
3 I did not learn wisdom, and I did not gain knowledge of the Holy God.
4 Who went up to heaven and came down? Who can hold the wind in his hands, and who can carry water in his clothes? Who established all the boundaries of the earth? Do you know His name, and what is the name of His Son?
5 Every word of God is pure. God becomes a shield for those who trust in Him.
6 Do not add to the words of God, otherwise He will judge you, and you will become a liar.
7 Do not deny my request. I will ask You for two things before I die.
8 Remove lie and meaningless things from me. Do not give me poverty nor riches. Provide me with my daily bread.
9 Otherwise, if I get rich, I will deny You and say, “Who is the Lord?” And if I become poor, I will steal and bring shame to the name of my God.
10 Do not speak lie about a servant to his master. Otherwise, he will curse you, and you will become guilty.
11 Some people curse their fathers and do not bless their mothers.
12 They think that they are pure, but they are dirty with their waste.
13 Oh, how proudly such people look around! What kind of disrespectful look they throw around!
14 Some people hurt with their teeth like swords. They cut with their jaws like knives. They eat the poor and needy people on the earth.
15 The leach has two daughters. They scream, “Give me more, give me more!” There are three things, and they will not be satisfied. There are even four things, and they will not say, “Enough!”
16 Death and a woman without children will not say, “Enough!” Fire and the earth will not be satisfied with water, they will not say, “Enough!”
17 If a person looks at his father and makes fun of him then crows will eat his eyes in the valley. If a person despises his mother and does not obey her then eagle’s children will eat him.
18 Three things amaze me so much, and I don’t understand four things.
19 I wonder how an eagle flies in the sky, and how a snake crawls on a rock. I do not understand how a ship navigates in the middle of the sea, and how a man finds his way to a young woman.
20 The same way, I do not understand the way of a woman who sleeps with different men. She ate, wiped her mouth and said, “I did nothing wrong.”
21 The earth shakes from three things, and it cannot tolerate four things.
22 It is not right when a slave becomes a king. And it is not right when a fool eats bread to the full.
23 It is not right when a woman who has evil plans gets married. And it is not right when a servant girl takes the place of her mistress.
24 Four little creatures live on the earth, but they are extremely wise.
25 Ants are not strong, but they prepare their food in the summer.
26 Mountain mice are weak, but they build their houses on the rock.
27 Locusts have no king, but they move in order.
28 Lizard quickly moves his legs, and it goes even to the royal palaces.
29 Three animals walk majestically, and even four of them move impressively.
30 A lion is mighty among all the animals, he will not turn away from anyone.
31 A rooster and a goat walk proudly, and a king majestically leads his army.
32 If you become proud then you will do foolishness. Stop, if you plan to do an evil thing.
33 He who beats milk will produce butter. If you beat the nose, then blood will flow. And he who pours out his anger will start a quarrel.

Chapter 31

1 These are the words of king Lemuel. His mother gave him these advices.
2 My son, I gave birth to you. My son, I dedicated you to God!
3 Do not give your strength to women. They destroy kings, do not give your ways to women.
4 Lemuel, kings should not drink wine. Rulers should not drink alcoholic drinks.
5 Otherwise, they will get drunk, and they will forget the law. And they will unjustly judge all the oppressed people.
6 People give a strong drink to a perishing person. And a grieving soul drinks wine.
7 He gets drunk and forgets about his poverty. And while he is still drunk, he does not remember about his suffering.
8 Raise your voice for helpless people and protect oppressed people.
9 Raise your voice for justice, for the case of a poor and a needy person.
10 A man who marries a business woman will treasure her more than precious jewels.
11 His wife will make his life rich. Her husband will trust her with all of his heart.
12 All the days of her life she will do good things to her husband. She will not harm him.
13 She gets wool and flax, she likes working with her hands.
14 Like ships she brings her food from distant places.
15 She gets up while it is still night. She distributes food in her house, and she gives work to her servant girls.
16 She plans to buy a field, and she does it. She plants a vineyard with the money she earned.
17 Her muscles are strong. She feels strength in her hands.
18 She sees that her business goes well. And her lamp does not stop shining even at night.
19 She stretches her hands to a spinning wheel, and she twists thread with her fingers.
20 She helps a poor and a needy person.
21 She is not afraid of cold weather because she dresses all her family in warm clothes.
22 She makes bed coverings for herself. She wears expensive clothes made of purple fabric.
23 People respect her husband when he discusses matters with the elders at the city gate.
24 She makes clothes and sells them. She makes belts and delivers them to sell-men.
25 Her clothes are strength and honor. And she looks at her future with confidence.
26 She speaks the Law of God the Creator with wisdom and kindness.
27 She watches over her household. She is not lazy, and she does not eat food just because she is bored.
28 Children stand up, and they call her blessed, her husband also praises her.
29 He says, “There are many business women, but you are the best.”
30 A pretty face deceives, and beauty disappears. But a woman who fears the Lord deserves to be praised.
31 Reward her according to her works. And let her deeds make her famous at the city gate.