Letter to the Galatians

Letter to the Galatians

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अध्याय 1

1 मैं प्रेरित पौलुस हूँ। लोगों ने मुझे प्रेरित होने का अधिकार नहीं दिया। लोगों ने मुझे इस सेवा में नहीं ठहराया। यीशु मसीह और पिता परमेश्वर ने जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, मुझे इस सेवा के लिए चुना।
2 मेरे साथ यहाँ कुछ भाई हैं और वे गलातिया के चर्चों को नमस्कार भेज रहे हैं।
3 पिता परमेश्वर और हमारे प्रभु यीशु मसीह की ओर से आपको अनुग्रह और शान्ति मिले।
4 हमारे परमेश्वर पिता ने अपनी योजना पूरी की और मसीह हमारे पापों के लिए मरा। यीशु ने हमें उस बुराई से छुटकारा दिलाया, जो इस दुनियाँ में है।
5 सभी युगों में हर कोई परमेश्वर की स्तुति करे। आमीन।
6 हे गलातियों, आपके साथ जो हो रहा है वह सुनकर मैं दुखी हूँ। परमेश्वर ने आपको बुलाहट और मसीह का अनुग्रह दिया। लेकिन आप इतनी जल्दी परमेश्वर से दूर हो गए और किसी दूसरी अच्छी खबर के पीछे हो लिए।
7 जबकि कोई दूसरी अच्छी खबर है ही नहीं। लेकिन ऐसे लोग हैं, जो आपको भ्रम में डालते हैं। वे मसीह की अच्छी खबर को बिगाड़ना चाहते हैं।
8 अगर कोई स्वर्गदूत मसीह की अच्छी खबर को बिगाड़ेगा और उसका प्रचार करेगा तो वह अपने ऊपर श्राप लाएगा। हम आपके पास सच्ची खबर लाए। लेकिन अगर हम यीशु की अच्छी खबर को बिगाड़ेंगे तो हम भी अपने ऊपर श्राप लाएंगे।
9 पहले मैंने आपको इसके बारे में बताया था और अब मैं इसे दोहराता हूँ। आपने हमसे मसीह के बारे में सच्ची खबर पाई। लेकिन अगर कोई आपको किसी दूसरी अच्छी खबर का प्रचार करता है तो वह अपने आप पर श्राप लाता है।
10 मुझे परमेश्वर की मंजूरी चाहिए या लोगों की? क्या मैं लोगों को खुश करने की कोशिश करूँ? अब मैं लोगों को खुश नहीं करता। मैं मसीह का गुलाम बन गया हूँ।
11 हे भाइयों, मैंने आपको मसीह के बारे में अच्छी खबर का प्रचार किया। आपको जानना चाहिए कि इसे रचने वाले लोग नहीं थे।
12 यीशु मसीह के प्रकाशन के द्वारा मैंने अच्छी खबर को जाना। मैंने मसीह से सीखा, न कि मनुष्य से।
13 पिछले समय में मैंने यहूदी धर्म का पालन किया। और आप जानते हैं कि उस समय मैं क्या कर रहा था। मैंने ज़बरदस्ती परमेश्वर के चर्च को सताया और इसे नष्ट किया।s
14 मैंने यहूदी धर्म के लिए अपने साथियों और दूसरे यहूदी लोगों से बहुत ज़्यादा अपने आप को समर्पित कर दिया। मैंने उन परम्पराओं के लिए, जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी थीं महान उत्साह दिखाया।
15 लेकिन परमेश्वर ने मुझे जन्म से पहले ही चुन लिया था। उसने मुझे अपनी बुलाहट और अनुग्रह दिया। परमेश्वर अपनी योजना को मेरे जीवन में पूरा करना चाहता था।
16 इसलिए उसने मुझे अपने बेटे के बारे में प्रकाशन दिया। और उस समय मैंने इस प्रकाशन के बारे में दूसरे लोगों की राय नहीं ली। लेकिन मैंने अन्यजाति लोगों को मसीह के बारे में अच्छी खबर का प्रचार करना शुरू किया।
17 तुरन्त इस प्रकाशन के बाद मैं यरूशलेम में उन प्रेरितों के पास नहीं गया, जिन्हें परमेश्वर ने मुझ से पहले इस सेवा में रखा था। लेकिन मैं अरब चला गया और फिर मैं दमिश्क शहर में लौट आया।
18 तीन साल के बाद मैं यरूशलेम आया। वहाँ मैं प्रेरित पतरस से मिला और उसके साथ पन्द्रह दिन बिताए।
19 मैं प्रेरित याकूब से भी मिला, जो प्रभु का भाई था। उस समय मैं वहाँ दूसरे प्रेरितों से नहीं मिला।
20 परमेश्वर जानता है कि जो मैं आपको लिख रहा हूँ वह सच है और मैं झूठ नहीं बोलता।
21 उसके बाद मैं उत्तर में सीरिया और किलिकिया प्रांतों में गया।
22 यहूदिया में मसीह के चर्च मुझे व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे।
23 लेकिन उन्होंने मेरे बारे में यह सुना, “एक आदमी है, जो मसीही लोगों को सताता था। लेकिन अब वह उसी विश्वास का प्रचार करता है, जिसे वह पहले नष्ट कर रहा था।”
24 और यहूदिया में चर्चों ने मेरे लिए परमेश्वर की महिमा की।

अध्याय 2

1 चौदह सालों बाद मैं फिर से बरनबास के साथ यरूशलेम गया। और इस बार तीतुस मेरे साथ आया।
2 मैंने उस प्रकाशन के कारण, जो परमेश्वर ने मुझे अन्यजातियों के बारे में दिया था यरूशलेम जाने का फैसला लिया। वहाँ मैं व्यक्तिगत रूप से चर्च के प्रभावशाली अगुवों से मिला। मैंने उन्हें उस तरीके के बारे में बताया, जिससे मैं अन्यजाति लोगों को मसीह के बारे में अच्छी खबर का प्रचार करता हूँ। मैं यह पक्का करना चाहता था कि हमारे बीच कोई असहमति नहीं और वे मेरी सेवा को पहचानते हैं।
3 मेरा साथी तीतुस एक अन्यजाति था। लेकिन चर्च के अगुवों ने उसे खतना करने के लिए मजबूर नहीं किया।
4 और इसलिए खतने के बारे में सवाल उठे। कुछ लोगों ने विश्वासी बनने का नाटक किया और हमारी सभाओं में आये। उन्होंने हमारा विश्वास हासिल किया और हमारी आज़ादी को छीनना चाहा, जो मसीह ने हमें दी है। ये झूठे विश्वासी हमें अपनी यहूदी परम्पराओं के गुलाम बनाना चाहते थे।
5 लेकिन हमने झूठे विश्वासियों की आज्ञा नहीं मानी और एक पल के लिए भी उनकी शिक्षाओं को स्वीकार नहीं किया। हमने आपके लिए उस सच्चाई को बचाये रखा, जो परमेश्वर ने मसीह के बारे में अच्छी खबर के द्वारा हम पर प्रकट की थी।
6 मैंने चर्च के बहुत आदरणीय अगुवों के सामने सच्चाई का बचाव किया। और वे लोग मेरे लिए कोई खास नहीं थे। ऐसे कोई खास लोग नहीं, जिन के कारण परमेश्वर अपनी सच्चाई को बदल दे। लेकिन चर्च के अगुवों के पास मेरे प्रकाशन के खिलाफ़ कुछ भी नहीं था।
7 और मैं और भी कहूँगा। उन्होंने मेरी तुलना पतरस से की। उन्होंने देखा कि परमेश्वर ने हमें अलग-अलग समूहों के लोगों को सौंप दिया। मैं अन्यजाति लोगों को अच्छी खबर का प्रचार करता हूँ। और इसी तरह से पतरस यहूदी लोगों को मसीह के बारे में प्रचार करता है।
8 परमेश्वर ने पतरस को यहूदियों के लिए प्रेरित ठहराया। और वह यहूदी लोगों के बीच में पतरस के द्वारा काम करता है। और उसी परमेश्वर ने मुझे अन्यजातियों के लिए प्रेरित ठहराया। और वह मेरे द्वारा अन्यजाति लोगों के बीच में भी काम करता है।
9 याकूब, पतरस और यूहन्ना चर्च के खम्भे के रूप में पहचाने जाते हैं। और उन्होंने उस उपहार को पहचाना, जो परमेश्वर ने मुझे दिया। उन्होंने माना कि हम एक जैसा काम करते हैं। लेकिन हम अन्यजाति लोगों के पास जाते हैं और वे यहूदी लोगों के पास जाते हैं।
10 उन्होंने हमें गरीबों को याद रखने और उनकी मदद करने के लिए कहा। लेकिन पहले भी मैंने गरीबों की मदद करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की।
11 लेकिन जब पतरस अन्ताकिया आया तब मैंने सबके सामने उसका विरोध किया, क्योंकि वह गलत था।
12 शुरुआत में पतरस ने यीशु पर विश्वास करनेवाले अन्यजाति लोगों के साथ खाना खाया। लेकिन बाद में कुछ लोग याकूब की तरफ से आये। उन्होंने मान लिया कि विश्वासियों को खतना करना चाहिए। और पतरस डरता था कि ये लोग उसकी आलोचना करेंगे। इसलिए पतरस अन्यजाति लोगों से बचने लगा और उनके साथ खाना खाना बन्द कर दिया।
13 दूसरे यहूदी विश्वासियों ने भी पतरस की तरह व्यवहार किया। और यहाँ तक कि बरनबास भी इस पाखंड में शामिल हो गया।
14 मैंने देखा कि वे उस सच्चाई से भटक रहे थे, जो परमेश्वर ने मसीह के बारे में अच्छी खबर के द्वारा हम पर प्रकट की थी। तब मैंने सबके सामने कहा, “पतरस, आप क्या कर रहे हैं? आप यहूदी हैं। लेकिन अब आप यहूदी कानूनों को नहीं मानते। आप अन्यजाति लोगों की तरह जीते हैं। लेकिन आप अन्यजाति लोगों को यहूदी परम्पराओं को मानने के लिए मजबूर करते हैं।”
15 हम यहूदी के रूप में पैदा हुए। जो मूसा के कानून में ज़रूरी था उसे हमने माना। इसलिए हमने सोचा कि हम अन्यजाति लोगों की तरह पाप नहीं करते।
16 लेकिन अब हम जानते हैं कि परमेश्वर उन लोगों को पाप से आज़ाद नहीं करता, जो मूसा के कानून को मानते हैं। इसलिए परमेश्वर उन्हें अपनी धार्मिकता नहीं देता। लेकिन परमेश्वर यीशु मसीह पर विश्वास करने वालों को पाप से आज़ाद करता है। और परमेश्वर उन्हें अपनी धार्मिकता देता है। हमने मसीह पर विश्वास किया। और हमारे विश्वास के द्वारा परमेश्वर ने हमें पाप से आज़ाद किया और हमें अपनी धार्मिकता दी। कोई भी व्यक्ति मूसा के कानून की माँगों को पूरा नहीं कर सकता। इसलिए किसी भी व्यक्ति को मूसा के कानून के आधार पर पाप से आज़ादी और परमेश्वर की धार्मिकता नहीं मिलेगी।
17 हम यहूदी हैं। हमने मूसा के कानून को माना और इसलिए हमने खुद को धर्मी समझा। लेकिन मसीह के द्वारा हमने परमेश्वर की धार्मिकता पाई। हमने कबूल किया कि हम पापी हैं और मसीह के पास आए। क्या इसका मतलब यह है कि मसीह ने हमें पापी बनाया? नहीं।
18 इससे उल्टा, मैं पापी व्यक्ति बन जाऊँगा अगर मैं मसीह को ठुकरा दूँ और मूसा के कानून में लौटूँ।
19 मैं मूसा के कानून को पूरा नहीं कर सका। कानून ने मुझे अपनी माँगों से मार दिया। लेकिन परमेश्वर ने मुझे जीवन दिया और अब मैं उसके लिए जीता हूँ। मैंने अपने पापी स्वभाव को मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ा दिया।
20 मेरा पापी स्वभाव मर गया और अब मसीह मुझ में जीता है। उसने मुझसे प्यार किया और मेरे लिए अपना जीवन दे दिया। मैं भौतिक शरीर में इस दुनियाँ में रहता हूँ लेकिन मैं परमेश्वर के बेटे पर विश्वास से जीता हूँ।
21 मैं परमेश्वर के अनुग्रह को नहीं ठुकराऊँगा। मान लीजिए कि परमेश्वर मूसा का कानून मानने वालों को पाप से आज़ाद करता है। और इसके द्वारा परमेश्वर उन्हें अपनी धार्मिकता देता है। इस मामले में, पापियों के लिए मसीह के मरने का क्या मतलब है?

अध्याय 3

1 हे गलातियों, आपने ऐसा बेवकूफी भरा काम किया है। आपको सच्चाई के खिलाफ़ किसने कर दिया? आपने झूठों पर विश्वास किया। मसीह आपके लिए क्रूस पर मरा। और आपने इसे इतनी गहराई से महसूस किया जैसे आपने इसे अपनी आँखों से देखा था।
2 पिछले समय में आपने मूसा के कानून को माना। अब मुझे एक सवाल का जवाब दीजिए। क्या उस समय परमेश्वर ने आपको अपनी आत्मा से भरा था? लेकिन बाद में आपने मसीह के बारे में सुना और उस पर विश्वास किया। और उसके बाद परमेश्वर ने आपको अपनी आत्मा दी।
3 शुरुआत में आपने पवित्र आत्मा की इच्छा के अनुसार काम किया। लेकिन अब आप अपने पुराने पापी स्वभाव को जीवन में वापस ले आए। आपने ऐसी बेवकूफी क्यों की?
4 आप बहुत सी परीक्षाओं से गुज़रे। क्या पवित्र आत्मा में जीवन से आपको कोई लाभ नहीं हुआ? बिल्कुल, आप परिणाम देख सकते थे!
5 पिछले समय में आपने मूसा के कानून को माना। लेकिन क्या उस समय परमेश्वर ने आपको अपनी आत्मा से भर दिया था? लेकिन क्या उस समय परमेश्वर ने आपके बीच में चमत्कार किये? नहीं। लेकिन बाद में आपने मसीह के बारे में सुना और उस पर विश्वास किया। और तब परमेश्वर ने आपको अपनी आत्मा दी। और तब परमेश्वर ने आपके बीच में चमत्कार करने शुरू कर दिए।
6 उसी तरह से अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया। परमेश्वर ने उसका विश्वास देखा और अब्राहम को अपनी धार्मिकता दी।
7 आपको समझना चाहिए कि विश्वास हमें अब्राहम के पुत्र बनाता है।
8 शास्त्रों ने भविष्यवाणी की थी कि अन्यजातियाँ परमेश्वर पर विश्वास करेंगी। और विश्वास से परमेश्वर उन्हें पाप से आज़ाद करेगा और उन्हें अपनी धार्मिकता देगा। परमेश्वर ने पहले से ही अब्राहम के सामने इस अच्छी खबर की घोषणा की। परमेश्वर ने कहा, “हे अब्राहम, मैं तुम्हारे द्वारा सभी राष्ट्रों को आशीष दूँगा।”
9 अब्राहम ने परमेश्वर पर विश्वास किया और परमेश्वर ने उसको आशीष दी। और हमने भी परमेश्वर पर विश्वास किया और परमेश्वर ने हमें वैसे ही आशीष दी जैसे उसने अब्राहम को आशीष दी थी।
10 मूसा ने कानून की किताब लिखी। यहूदी लोग मूसा के कानून को मानते हैं और धार्मिकता प्राप्त करने की उम्मीद करते हैं। लेकिन उन पर श्राप पड़ते हैं, क्योंकि शास्त्र कहते हैं, “जो मूसा के पूरे कानून को नहीं मानता, उस पर श्राप पड़ता है।”
11 यह साफ़ है कि परमेश्वर मूसा का कानून मानने वाले को पाप से आज़ाद नहीं करता। इसलिए परमेश्वर उसे अपनी धार्मिकता नहीं देता। लेकिन परमेश्वर यीशु पर विश्वास करने वाले को पाप से आज़ाद करता है। और परमेश्वर ऐसे विश्वासी को अपनी धार्मिकता देता है। धर्मी व्यक्ति परमेश्वर पर विश्वास करता है। धर्मी व्यक्ति परमेश्वर के लिए जीता है।
12 लेकिन मूसा के कानून का विश्वास से कोई लेना-देना नहीं। कानून पर विश्वास करने की कोई ज़रूरत नहीं। लोगों को कानून मानना ही है। और जो कानून को मानता है वह इसके लिए जीता है।
13 मसीह ने उस भविष्यवाणी को पूरा किया, जिसके बारे में मूसा का कानून कहता है, “हर कोई जिसे लकड़ी के क्रूस पर मारा जाता है, उस पर श्राप पड़ता है।” लेकिन मसीह ने मूसा के सारे कानून को पूरा किया और वह इस श्राप के लायक नहीं था। यीशु हमारे बदले में क्रूस पर श्रापित हुआ। उसने अपने खून से हमारी आज़ादी के लिए मूल्य चुकाया। मसीह ने हमें कानून के श्राप से बचाया।
14 और यीशु मसीह के द्वारा अब्राहम की आशीष अन्यजाति लोगों में फैल गई। परमेश्वर ने हमें पवित्र आत्मा देने का वादा किया और हमने विश्वास से पवित्र आत्मा को पाया।
15 हे भाइयों, मैं आपको उस बात के बारे में बताता हूँ, जो हर कोई जानता है। लोग उस समझौते को सही मानते हैं जिसे कोई व्यक्ति नियमों के अनुसार बनाता है। और कोई भी ऐसे समझौते को नहीं बदलता और इसमें कुछ भी नहीं जोड़ता।
16 परमेश्वर ने अब्राहम के साथ अटूट समझौता किया। इस समझौते में परमेश्वर ने अब्राहम और उसके इकलौते बेटे से वादे किए। लेकिन परमेश्वर ने कई बेटों के बारे में नहीं कहा। परमेश्वर ने इकलौते बेटे के बारे में बात की, परमेश्वर ने मसीह के बारे में बात की। मसीह को ये वादे विरासत में मिले, जो परमेश्वर ने अब्राहम को दिए थे।
17 सुनिये, सबसे पहले परमेश्वर ने अब्राहम के साथ अटूट समझौता किया और उसी समय परमेश्वर ने अब्राहम को मसीह के बारे में बताया। 430 साल बीत गए और उसके बाद ही परमेश्वर ने मूसा के द्वारा यहूदियों को अपना कानून दिया। लेकिन कानून उस अटूट समझौते को रद्द नहीं करता, जो परमेश्वर ने पहले अब्राहम के साथ किया था।
18 मान लीजिए कि परमेश्वर मूसा का कानून मानने वालों को विरासत दे। इस मामले में, परमेश्वर को यह विरासत अब्राहम से ले लेनी होगी। लेकिन 430 साल पहले परमेश्वर ने पहले से ही अब्राहम के साथ अटूट समझौता किया था। और परमेश्वर ने इस समझौते में वादा किया कि वह अब्राहम को विरासत देगा।
19 फिर परमेश्वर ने कानून क्यों दिया? सबसे पहले परमेश्वर ने अब्राहम से वादा किया कि वह उसे एक बेटा देगा। परमेश्वर ने मसीह के बारे में बताया। लेकिन लोगों ने पाप किया इसलिए बाद में परमेश्वर ने उन्हें कानून दिया। मूसा के कानून ने सिर्फ़ उस समय तक काम किया जब तक कि अब्राहम का वादा किया हुआ बेटा नहीं आया। परमेश्वर ने अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा दी और वे कानून को मूसा के पास ले आए। और मूसा ने कानून को लिखा और परमेश्वर और लोगों के बीच में बिचवई बन गया।
20 बिचवई दोनों दलों के हितों को दिखाता है। लेकिन जब परमेश्वर ने अब्राहम से वादा किया तब उसने बिचवई का इस्तेमाल नहीं किया। परमेश्वर ने मसीह के बारे में बताया और इसका मतलब है कि परमेश्वर ने अपने बारे में बताया।
21 इसलिए मूसा कहता है कि लोगों को कानून को मानना है। और अब्राहम कहता है कि हमें परमेश्वर के वादों पर विश्वास करना है। क्या यह एक दूसरे का विरोध करते हैं? नहीं! मान लीजिए कि परमेश्वर ऐसा कानून लाए, जो जीवन दे सके। तब परमेश्वर उन लोगों को पाप से आज़ाद करता, जो कानून को मानते हैं। और परमेश्वर उन्हें अपनी धार्मिकता देता।
22 लेकिन शास्त्र कहते हैं कि सभी लोग पाप की शक्ति के अधीन हैं, इसलिए परमेश्वर ने उन्हें कानून दिया। कानून के अनुसार लोगों ने अपने पापों के लिए बलिदान चढ़ाये। बलिदानों ने लोगों को पाप से आज़ाद नहीं किया लेकिन बलिदानों ने मसीह की ओर इशारा किया। परमेश्वर ने मूसा से मसीह के बारे में बात की। परमेश्वर ने अब्राहम से मसीह के बारे में बात की। और मसीह में परमेश्वर ने उस वादे को पूरा किया, जो उसने अब्राहम से किया था। हम यीशु मसीह पर विश्वास रखते हैं, इसलिए परमेश्वर हमें पाप से आज़ाद करता है। और परमेश्वर हमें विश्वास के द्वारा अपनी धार्मिकता देता है।
23 एक निश्चित समय तक हम मूसा के कानून की कैद में रहे। लेकिन फिर विश्वास का समय आया और मूसा के कानून का समय खत्म हो गया।
24 मूसा के कानून ने हमें मसीह तक पहुँचने का रास्ता दिखाया। अब हम यीशु पर विश्वास रखते हैं, इसलिए परमेश्वर हमें पाप से आज़ाद करता है और हमें अपनी धार्मिकता देता है।
25 अब विश्वास का समय आ गया है और अब मूसा का कानून हमारे जीवन पर शासन नहीं करता।
26 जब आपने यीशु मसीह पर विश्वास किया तब आप परमेश्वर से पैदा हुए और उसके बेटे बन गये।
27 आप सभी ने मसीह के नाम में पानी का बपतिस्मा लिया। और मसीह में आप सभी ने परमेश्वर के नए स्वभाव को अपने अन्दर के इंसान को पहनाया।
28 अब यीशु मसीह ने हम सभी को अपने आप में एकजुट किया। इसलिए मसीह में न तो कोई यहूदी है और न ही कोई अन्यजाति। मसीह में गुलाम और आज़ाद व्यक्ति में कोई अंतर नहीं। इसलिए मसीह में यह मायने नहीं रखता कि आप आदमी हैं या औरत।
29 अब आप मसीह के हैं। इसलिए आप अब्राहम के वंश हैं। इसलिए आप अब्राहम के वारिस हैं। और इसलिए आपको वह मिलता है जो परमेश्वर ने अब्राहम को देने का वादा किया था।

अध्याय 4

1 मान लीजिए कि किसी परिवार में पिता की मौत हो जाती है। तब पूरी विरासत उसके बच्चे की हो जाती है। बचपन के दिनों में चाहे वारिस पूरी विरासत का स्वामी बन गया हो फिर भी वारिस और गुलाम में कोई फर्क नहीं होता।
2 वारिस अपने रखवालों और प्रबंध करने वालों की आज्ञा मानता है। जब वह अपने पिता के द्वारा ठहराई गई उम्र में पहुँचेगा तब वह अपनी विरासत को पाएगा।
3 मैं उस समय से इसकी तुलना करूँगा जब तक मसीह पृथ्वी पर नहीं आए थे। उस समय हम परिपक्व उम्र तक नहीं पहुँचे थे। हम इस दुनियाँ में रहते थे और बच्चों की तरह हम परम्पराओं और नियमों का पालन करते थे।
4 लेकिन परमेश्वर ने सही समय ठहराया और अपने बेटे को भेजा। मरियम ने परमेश्वर के बेटे को जन्म दिया और वह मूसा के कानून के अधिकार में रहा।
5 हम सभी मूसा के कानून के अधिकार में थे। लेकिन मसीह ने कानून की सभी माँगों को पूरा किया और हमारे पापों के लिए अपने खून से मूल्य चुकाया। उसने हमारी आज़ादी के लिए मूल्य चुकाया और हमें मूसा के कानून के अधिकार से बाहर निकाला। परमेश्वर ने हमें गोद लिया और हमें वे सभी अधिकार मिले, जो बच्चों के पास होते हैं।
6 आप परमेश्वर के बेटे बन गए। परमेश्वर ने आपके दिलों में वह आत्मा भेजी, जो उसके बेटे की है। उसके बेटे की आत्मा परमेश्वर को “हे पिता, हे पिता!” कहकर पुकारती है।
7 सुनिये, अब परमेश्वर आप को अपना बेटा कहता है न कि गुलाम। आप परमेश्वर के बेटे बन गए और आप यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के वारिस बन गए।
8 पहले आप मसीह के बिना रहते थे और परमेश्वर को नहीं जानते थे। और आपने गुलाम की तरह दिखाई देने वाली बातों को माना। लेकिन दिखाई देने वाली बातों को परमेश्वर का स्थान नहीं देना चाहिए।
9 अब आप परमेश्वर को जानते हैं। और मैं और भी कहूँगा कि अब परमेश्वर आप को जानता है। परम्पराओं ने आपको मज़बूत नहीं बनाया लेकिन आप फिर से उनके पास लौट गए। आप उन नियमों का पालन करते हैं जिनसे आपको कोई फ़ायदा नहीं हुआ। आप फिर से दिखाई देने वाली चीजों के गुलाम क्यों बनना चाहते हैं?
10 आप कुछ दिनों, महीनों और मौसमों पर खास ध्यान क्यों देते हैं?
11 मैंने आप के बीच में इतनी मेहनत की है। लेकिन मुझे डर है कि मेरे काम का कोई परिणाम नहीं निकला।
12 मैं यहूदी हूँ। और आप अन्यजाति लोग हैं। लेकिन मैंने यहूदी परम्पराओं को मानना बन्द कर दिया। मैं भी आपके जैसा ही बन गया। हे भाइयों, मैं आपसे विनती करता हूँ, वैसे ही आज़ादी में जियें जैसे मैं जीता हूँ। जब मैं पहली बार आप के पास आया तब आप ने मेरे साथ अच्छा बर्ताव किया था।
13 याद कीजिए कि उस समय मैं आप को मसीह के बारे में अच्छी खबर को प्रचार कर रहा था लेकिन मैं बीमार था।
14 मेरी शारीरिक दशा आप के लिए परीक्षा बनी। लेकिन आपने मुझसे निन्दा ​​से बात नहीं की। आपने मुझे घृणा से नहीं देखा। इसके बजाय, आपने मुझे परमेश्वर के स्वर्गदूत की तरह अपनाया। आपने मेरे साथ यीशु मसीह जैसा व्यवहार किया।
15 आपने मुझ पर ऐसी दया दिखाई! जैसे कि किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी आँखें देना नामुमकिन है। लेकिन मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कहता हूँ कि आप मेरे लिए ऐसा करने के लिए भी तैयार थे।
16 लेकिन क्या अब मैं आपका दुश्मन बन गया हूँ, क्योंकि मैं आप को सच्चाई बताता हूँ?
17 आपने झूठों पर विश्वास किया जिनके इरादे अच्छे नहीं थे। ये झूठे शिक्षक जलन के कारण आपको मेरे प्रभाव से बचाते हैं। वे आपका ध्यान अपनी ओर करना चाहते हैं।
18 अच्छे लोग हमेशा अच्छा काम करते हैं और न कि सिर्फ़ तब जब दूसरे लोग उन्हें देखते हैं। लेकिन ये झूठे लोग मेरे जाने के बाद आपको अपनी शिक्षाओं से नुकसान पहुँचाते हैं।
19 हे मेरे बच्चों, मैं फिर से कष्टों से गुज़रता हूँ और आप को फिर से जन्म देता हूँ। मैं ऐसा तब तक करूँगा जब तक मैं आप में मसीह का स्वरूप नहीं देख लेता!
20 मैं आपके साथ रहना चाहूँगा और गम्भीर बातचीत करूँगा। मुझे समझ में नहीं आता कि आपको क्या हो गया है।
21 आप मूसा के कानून के अनुसार जीना चाहते हैं। मुझे बताइए, क्या आप समझते हैं कि यह कानून क्या कहता है?
22 हम शास्त्रों में पढ़ते हैं, “अब्राहम के दो बेटे थे। हाजिरा गुलाम थी और उसने इश्माएल को जन्म दिया। और सारा आज़ाद औरत थी और उसने इसहाक को जन्म दिया।”
23 गुलाम औरत के बेटे का जन्म मनुष्य की इच्छा से हुआ। और आज़ाद औरत के बेटे का जन्म परमेश्वर की इच्छा से हुआ। परमेश्वर ने अपना वह वादा पूरा किया, जो उसने अब्राहम से किया था।
24 ये दोनों औरतें दो समझौतों को दिखाती हैं। हाजिरा गुलाम है और वह गुलामों को जन्म देती है। वह पहले समझौते को दिखाती है, जो परमेश्वर ने सिनै पर्वत पर किया था।
25 इसलिए हाजिरा अरब का सिनै पर्वत है। और यह पर्वत सांसारिक यरूशलेम को दिखाता है। सांसारिक यरूशलेम और उसके बच्चे मूसा के कानून के अधीन गुलामी में हैं।
26 दूसरी औरत सारा है। वह आज़ाद बच्चों को जन्म देती है। सारा स्वर्गीय यरूशलेम को दिखाती है, जहाँ आज़ाद लोग रहते हैं।
27 शास्त्र कहते हैं, “हे स्त्री, आनन्दित हो! तुम्हारे बच्चे नहीं हो सकते। तुमने कभी जन्म नहीं दिया और तुम को जन्म देने का दर्द नहीं हुआ। तुम छोड़ी हुई महसूस करती हो। लेकिन तुम्हारे पास शादीशुदा स्त्री से कई अधिक बच्चे होंगे। हे स्त्री, आनन्दित हो और आनन्द से चिल्लाओ!”
28 जब सारा ने इसहाक को जन्म दिया तब परमेश्वर ने अपना वह वादा पूरा किया, जो उसने अब्राहम से किया था। हे भाइयों, हम भी इसहाक की तरह पैदा हुए थे।
29 इश्माएल का जन्म मनुष्य की इच्छा से हुआ। और इसहाक का जन्म पवित्र आत्मा की इच्छा से हुआ। और उस समय इश्माएल ने इसहाक को सताया था। वही अब भी होता है।
30 शास्त्र क्या कहते हैं? गुलाम का बेटा वारिस नहीं बनेगा। आज़ाद औरत के बेटे को विरासत मिलेगी। इसलिए इस गुलाम और उसके बेटे को बाहर निकालो।
31 हे भाइयों, मेरी बात सुनिये। हमें आज़ाद औरत ने जन्म दिया है, ना कि गुलाम औरत ने।

अध्याय 5

1 मसीह ने हमें आज़ाद किया है। इसलिए आज़ादी से जियें और मूसा के कानून की गुलामी के बोझ के नीचे वापस न जाएं।
2 और मैं, पौलुस, आपको और भी अधिक बताऊँगा। अगर आप खतना करवाते हैं तो आप मसीह के बलिदान को अब महत्व नहीं देते।
3 मैं एक बार फिर से खतना करने वालों के विरुद्ध घोषणा करता हूँ। आपको मूसा के कानून की सभी माँगों को पूरा करना पडे़गा।
4 मूसा का कानून लोगों को पाप से आज़ाद नहीं करता और उन्हें परमेश्वर की धार्मिकता नहीं देता। अगर आप कानून को मानते हैं तो आप खुद को मसीह से अलग करते हैं। आपने उसका अनुग्रह खो दिया है।
5 लेकिन हम आत्मा से जीते हैं। और पूरे आत्मविश्वास के साथ हम उम्मीद रखते हैं कि विश्वास से परमेश्वर हमें अपनी धार्मिकता देगा।
6 मसीह में खतना ने अपनी शक्ति खो दी। अब खतना और खतनारहित के बीच में कोई अन्तर नहीं। मसीह में सिर्फ़ विश्वास मायने रखता है। और अगर आप एक दूसरे के साथ प्यार से व्यवहार करते हैं तो इस तरह से आपका विश्वास मजबूत होगा।
7 आप सही दिशा में जा रहे थे। आपको किसने रोक दिया? आपको सच्चाई के खिलाफ़ किसने कर दिया?
8 परमेश्वर ने आपको आज़ादी से जीने के लिए बुलाया लेकिन आपने झूठे शिक्षकों पर विश्वास किया।
9 याद रखें कि थोडा सा खमीर सारे आटे को खमीरी कर देता है।
10 प्रभु मुझे आश्वासन देता है कि आप इस झूठी शिक्षा का पालन नहीं करेंगे। परमेश्वर उस व्यक्ति का न्याय करेगा, जो आपको गुमराह करता है। और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह व्यक्ति कौन है।
11 हे भाइयों, क्या आप जानते हैं कि यहूदी लोग मुझे क्यों सताते हैं? मैं प्रचार करता हूँ कि परमेश्वर मसीह पर, जिसे क्रूस पर चढ़ाया गया था विश्वास करने के द्वारा अपनी धार्मिकता हमें देते हैं। मैं भी कहता हूँ कि परमेश्वर खतना के द्वारा अपनी धार्मिकता नहीं देता। और यह यहूदियों को नाराज करता है।
12 जो आपका खतना करना चाहते हैं उनसे अपना सम्पर्क तोड़ लें। झूठे शिक्षकों से पीछा छुड़ाएं और आप समस्या से पीछा छुड़ा लेंगे।
13 हे भाइयों, परमेश्वर ने आपको अपने पास बुलाया और आपको आज़ादी दी। लेकिन इस आज़ादी का मतलब यह नहीं कि आप जो चाहें वह कर सकते हैं। अपने पापी स्वभाव की इच्छाओं का पालन न करें। परमेश्वर ने आपको आज़ाद किया, और अब आप प्यार से एक दूसरे की सेवा करें।
14 मूसा का सारा कानून एक बात के बारे में बोलता है, “दूसरे व्यक्ति से वैसे ही प्यार करें जैसे आप खुद से प्यार करते हैं।”
15 एक दूसरे को झगड़ों से दुखी न करें। जानवरों की तरह एक दूसरे पर हमला न करें। नहीं तो, आप अपने आप को नष्ट कर देंगे।
16 मैं आपको बताता हूँ कि आत्मिक चीजों के बारे में सोचें। और आप पवित्र आत्मा की इच्छाओं का पालन करेंगे। पापी चीजों के बारे में न सोचें। और आप अपने पापी स्वभाव की इच्छाओं का पालन नहीं करेंगे।
17 आपका पापी स्वभाव पवित्र आत्मा की इच्छाओं के खिलाफ़ उठता है। और पवित्र आत्मा उन इच्छाओं के खिलाफ़ लड़ती है, जो आपके पापी स्वभाव की ओर से आती हैं। ये दो शक्तियाँ एक दूसरे का विरोध करती हैं। इसलिए उन इच्छाओं के बारे में सोचें, जो पवित्र आत्मा की ओर से आती हैं और तब आप अच्छे काम करेंगे। लेकिन अगर आप पापी चीजों के बारे में सोचते हैं तो आप बुरे काम करेंगे।
18 अब आप पवित्र आत्मा की अगुवाई के पीछे चलते हैं। आप अब मूसा के कानून के अधिकार में नहीं रहते।
19 लोग पापी चीजों के बारे में सोचते हैं और अपने पापी स्वभाव के अधीन हो जाते हैं। और यही उनके जीने का तरीका है। वे अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार नहीं होते और गलत यौन संबंधों में भाग लेते हैं। वे अशुद्ध काम करते हैं और भोग विलास में आनन्दित होते हैं।
20 वे मूर्तियों की पूजा करते हैं और जादू टोने का अभ्यास करते हैं। वे एक दूसरे से नफ़रत करते हैं और एक दूसरे से लड़ाई करते हैं। जब दूसरे लोग सफ़ल होते हैं तब वे दुखी हो जाते हैं। वे गुस्सैल हो जाते हैं और दूसरों की परवाह नहीं करते। वे झगड़े करते और झूठी शिक्षाओं का पालन करते हैं।
21 वे ईर्ष्या और हत्या करते हैं। वे नशे में चूर हो जाते हैं, भ्रष्ट जीवन जीते हैं और ऐसे ही दूसरे पाप करते हैं। मैंने पहले आपको चेतावनी दी थी और मैं इसे फिर से दोहराता हूँ। जो व्यक्ति ऐसे काम करता है वह परमेश्वर की विरासत को नहीं पाएगा और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं करेगा।
22 और जो लोग आत्मिक बातों के बारे में सोचते हैं वे पवित्र आत्मा के फल लाते हैं। वे एक दूसरे से प्यार करते हैं। वे आनन्द और शान्ति से भरे रहते हैं। वे बहुत धीरज रखते हैं और दूसरों की मदद करने से इनकार नहीं करते। वे अच्छे काम करते हैं और लोग उनकी विश्वासयोग्यता को महत्व देते हैं।
23 वे दयालु होते हैं और वे अपने आप को अनुशासित कर सकते हैं। मूसा का कानून ऐसे लोगों को दोषी नहीं ठहराता।
24 हम मसीह के हैं। हमने अपने पुराने पापी स्वभाव को अपनी नुकसानदायक आदतों और पापी इच्छाओं के साथ क्रूस पर कीलों से ठोक दिया।
25 पवित्र आत्मा ने हमें जीवन दिया है। इसलिए हमें आत्मिक बातों के बारे में सोचना है और पवित्र आत्मा की इच्छाओं का पालन करना है।
26 घमंड न करें। यह दूसरों को चिढ़ाता है और ईर्ष्या लाता है।

अध्याय 6

1 हे भाइयों, मान लीजिए कि आप में से एक पाप में गिर गया। इस मामले में, आपके बीच में आत्मिक और सिद्ध लोग हैं जो ऐसे व्यक्ति को सही कर सकते हैं। लेकिन उन्हें इसे दया के साथ करना है। आप सभी को अपने आप की रखवाली करनी है और उस परीक्षा का विरोध करना है जिसका विरोध करने में आपका भाई असफल रहा।
2 एक दूसरे की मदद करें और मुश्किलों में से एक साथ होकर जाएं। इस तरह से आप उस नए कानून को पूरा करेंगे, जो मसीह ने हमें दिया है।
3 लेकिन कुछ लोग दूसरों की मदद नहीं करते। वे सोचते हैं कि वे बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। ऐसे लोग खुद को धोखा देते हैं, वे बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं।
4 अपने काम के बारे में सोचें और जो आप करते हैं उसका आनन्द लें। तब आप दूसरे लोगों की मंजूरी पर निर्भर नहीं होंगे।
5 याद रखें कि आप ही वह व्यक्ति हैं जो अपने जीवन के लिए जिम्मेदार हैं।
6 जो आपको परमेश्वर का वचन सिखाते हैं उनकी मदद करें। आपके पास जो कुछ है वह सब उनके साथ बांटें।
7 अपने आप को धोखा न दें और परमेश्वर पर दोष न लगाएं। जो बीज लगाए उसी की फसल आप इकट्ठा करेंगे।
8 जो अपने पापी स्वभाव को खुश करता है वह पाप के बीज बोता है। ऐसा व्यक्ति मौत की फ़सल इकट्ठा करेगा। और जो पवित्र आत्मा को खुश करता है वह पवित्र आत्मा के बीज बोता है। ऐसा व्यक्ति अनन्त जीवन की फ़सल इकट्ठा करेगा।
9 जो सही है वही करें। अच्छे बीज बोने से न थकें। अगर हम कमज़ोर नहीं होंगे तो सही समय आएगा जब हम अपनी फ़सल इकट्ठा करेंगे।
10 मौके को न खोएं और सभी लोगों की मदद करें। लेकिन सबसे पहले, उन लोगों के लिए भला करें, जो परमेश्वर के परिवार के हैं।
11 अब मैं आपको अपने हाथ से लिख रहा हूँ। क्या आप देख सकते हैं कि मैं बड़े अक्षरों से लिख रहा हूँ?
12 हम प्रचार करते हैं कि परमेश्वर मसीह के क्रूस के द्वारा अपनी धार्मिकता देता है, न कि खतना के द्वारा। और इसके कारण यहूदी लोग हमें सताते हैं। लेकिन ऐसे लोग भी हैं जो सताव से डरते हैं और वे आपको खतना कराने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे लोग अपने खतने पर घमंड करते हैं और वे मसीह के क्रूस को महत्व नहीं देते।
13 आपको पता होना चाहिए कि जो लोग खतना करवाते हैं, वे मूसा के कानून को नहीं मानते। लेकिन वे आपका खतना करना चाहते हैं, क्योंकि वे आपके खतने के बारे में घमंड करना चाहते हैं।
14 और मैं किसी भी चीज़ पर घमंड नहीं करना चाहता। मैं सिर्फ़ हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस को महत्व देता हूँ। अब क्रूस मेरे और संसार के बीच में खड़ा है। मैंने संसार को क्रूस पर चढ़ाया। संसार मेरे लिए मर गया। और संसार ने मुझे क्रूस पर चढ़ाया। और मैं संसार के लिए मर गया।
15 अब आप मसीह के हैं। और यह महत्वपूर्ण नहीं कि कौन खतना किया हुआ या खतनारहित है। लेकिन सबसे ज़्यादा यह मायने रखता है कि परमेश्वर ने आपके अन्दर के इंसान को अपना नया स्वभाव दिया। आप नई रचना हैं।
16 आप मसीह के क्रूस के द्वारा परमेश्वर के नए राष्ट्र बने न कि खतना के द्वारा। परमेश्वर ने आप पर दया की और आपको शान्ति दी। अब आप परमेश्वर के इस्राएल हैं।
17 आप मेरा विरोध क्यों करते हैं? मैंने पहले ही प्रभु यीशु के लिए दु:ख उठाया और मेरे शरीर पर घावों के निशान हैं।
18 हे भाइयों, हमारे प्रभु यीशु मसीह के अनुग्रह से आपकी आत्मा भर जाए। आमीन।

STAN & LANA

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